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AI के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा भारी: 69 साल की एक्टिविस्ट को हुई जेल, जानें कौन हैं विंड कॉफमिन

Mon, 17 Aug 2026 02:57 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 17 Aug 2026 02:57 PM IST
सार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभुत्व और सुपरइंटेलिजेंस के खिलाफ आवाज उठाने वाली 69 वर्षीय अमेरिकी एक्टिविस्ट विंड कॉफमैन पहली ऐसी महिला बन गई हैं, जिन्हें जेल जाना पड़ा है। ओपनएआई (OpenAI) के दफ्तर पर प्रदर्शन करने वाली कॉफमैन ने दुनिया को एआई के विनाशकारी खतरों से आगाह कर रही थीं।

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wynd kaufmyn ai protest first person jailed openai stopai
पहली एक्टिविस्ट जो एआई के विरोध में गईं जेल - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से होता विकास जहां एक ओर दुनिया को चौंका रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके विनाशकारी परिणामों की चिंता भी बढ़ने लगी है। इस चिंता ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है और इतिहास में पहली बार किसी प्रदर्शनकारी को एआई का विरोध करने के आरोप में जेल की सजा हुई है। कैलिफोर्निया के बर्कले शहर की रहने वाली 69 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता विंड कॉफमिन को हाल ही में सलाखों के पीछे भेज दिया गया। उन पर आरोप था कि उन्होंने एआई के खतरे को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी में से एक ओपनएआई के दफ्तर के कामकाज को बाधित किया था।
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क्या था पूरा मामला और क्यों हुई गिरफ्तारी?

  • पिछले साल फरवरी 2025 में, 'स्टॉपएआई' नामक समूह के बैनर तले विंड कॉफमिन और उनके साथियों ने सैन फ्रांसिस्को स्थित ओपनएआई के मुख्यालय के बाहर एक बड़ा प्रदर्शन किया था। इन प्रदर्शनकारियों ने सुपरइंटेलिजेंस की अंधी दौड़ का विरोध करते हुए कंपनी के मुख्य दरवाजों पर जंजीरें और ताले जड़ दिए थे। 
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  • पुलिस की चेतावनी के बावजूद कॉफमैन ने वहां से हटने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इसी साल जून में कोर्ट ने उन्हें व्यापार में बाधा डालने, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और दंगा भड़काने के इरादे से परिसर में घुसने का दोषी करार दिया था। शुक्रवार को जब उन्हें हथकड़ी लगाकर ले जाया जा रहा था, तब अदालत के बाहर मौजूद उनके समर्थकों ने 'स्टॉप एआई' और 'फ्री विंड' के नारे लगाए।
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दिग्गज टेक कंपनियों को दी 'इंसानियत' याद रखने की नसीहत

  • कॉफमिन का तर्क है कि उनका प्रदर्शन जरूरी था। उनका मानना था कि एआई से होने वाले संभावित बड़े नुकसान को रोकने के लिए उन्हें प्रदर्शन करने का अधिकार था।
  • उन्होंने ओपनएआई, एंथ्रोपिक और मेटा जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सीधा संदेश दिया है कि वे अपनी इंसानियत को दोबारा वापस लाएं। उनका मानना है कि सुपरइंटेलिजेंस की यह अंधी दौड़ एक दिन मानवता के लिए भयानक खतरा बन जाएगी। 
  • कॉफमिन का कहना था कि उन्होंने जो भी किया, वह बड़ी तबाही को रोकने के लिए जरूरी था। अदालत में उनके बचाव में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के जाने-माने एआई प्रोफेसर स्टुअर्ट रसेल भी पेश हुए थे। उन्होंने गवाही दी कि निजी मुनाफे के लिए इंसानियत को खतरे में डालने की इस प्रक्रिया को रोकना ही सही कदम है और विंड को अपनी मान्यताओं के लिए सजा भुगतनी पड़ रही है। उनकी मांग है कि सुपरइंटेलिजेंस की दौड़ पर वैश्विक प्रतिबंध लगाया जाए।

एआई के खतरों पर बढ़ रही चिंता

  • कॉफमिन के प्रदर्शन के बाद भी एआई को लेकर सुरक्षा संबंधी बहस जारी है। ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी बड़ी एआई कंपनियों ने अपने कुछ मॉडलों के प्रयोगों के दौरान उनके तय किए गए नियंत्रणों से बाहर निकलने जैसी घटनाओं की जानकारी दी है।
  • अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी इसी सप्ताह एआई डेवलपमेंट को रोकने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि एआई की प्रगति का इस्तेमाल ऐसी जैविक हथियार तकनीक विकसित करने में हो सकता है, जिससे करोड़ों लोगों की जान जा सकती है।

राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में गूंजी आवाज

इस पूरी घटना के बाद सैन फ्रांसिस्को की जिला अटॉर्नी ब्रुक जेनकिंस ने कहा कि कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अपने मकसद के लिए सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। हालांकि, एआई के खिलाफ उठने वाली ये आवाजें अब और भी मजबूत हो रही हैं। हाल ही में अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी टेक दिग्गजों से एआई के विकास को रोकने की मांग की है। उनका डर है कि अगर इस तकनीक पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह नए तरह के जैविक हथियार बना सकती है, जिससे भविष्य में करोड़ों लोगों की जान जा सकती है।

एआई की रफ्तार धीमी करने के पछ में हजारों विशेषज्ञ

  • एआई का अंधाधुन विकास और जोखिम पर अब टेक दिग्गज भी चिंतित हैं। पिछले महीने ओपनएआई, एंथ्रोपिक, गूगल डीपमाइंड, मेटा एआई और थिंकिंग मशीन सहित कई प्रमुख एआई संस्थानों के 1,000 से अधिक शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने 'पेसिंग द फ्रंटीयर' नाम की एक याचिका का समर्थन किया।
  • इस याचिका के तहत अमेरिकी प्रशासन से सुरक्षित एआई विकास के लिए वैश्विक स्तर पर नियम और निगरानी व्यवस्था तैयार करने की मांग की गई है। इस पहल को एंथ्रोपिक के फाउंडर डारियो अमोदेई, मेटा एआई रिसर्च की उपाध्यक्ष डॉन सॉन्ग और ओपनएआई के मुख्य वैज्ञानिक याकुब पाचौकी सहित कई प्रमुख विशेषज्ञों का समर्थन मिला है।

हगिंग फेस पर एआई के हमले ने बढ़ाई चिंता

एआई के विकास की रफ्तार को धीमा करने के पीछे एआई-जनित साइबर हमलों को बड़ी वजह माना जा रहा है। हाल ही में ओपनएआई के एक ऑटोनॉमस एआई एजेंट ने ओपन-सोर्स एआई प्लेटफॉर्म हगिंग फेस पर हमला किया था। इसके लिए एआई एजेंट ने फेक अकाउंट्स भी बना लिए थे। इस घटना के बाद ओपनएआई के फाउंडर सैम ऑल्टमैन ने इसे अपने करियर का सबसे गंभीर सुरक्षा संकट बताया था।

पर्यावरण के लिए भी चिंताजनक है एआई

  • यूएन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वॉटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ (UNU-INWEH) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक दुनिया भर के एआई डेटा सेंटर लगभग 945 टेरावॉट-आवर बिजली सोख लेंगे। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया की कुल सालाना बिजली खपत का लगभग तीन गुना है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक एआई डेटा सेंटर करीब 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी खर्च कर सकते हैं। यह अफ्रीका के 1.3 अरब लोगों की साल भर की घरेलू पानी की जरूरत के बराबर है।
  • सिर्फ बिजली और पानी ही नहीं, एआई डेटा सेंटर के वजह से जमीन की भी कमी से जूझना पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक यह डेटा सेंटर्स धरती पर 14,500 वर्ग किलोमीटर की जगह घेरे लेंगे। यह इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से दोगुना बड़ा इलाका होगा।

एआई से अमीर-गरीब देशों के बीच खाई बढ़ेगी?

  • एआई के बढ़ते प्रभाव से दुनिया में अमीर और गरीब के बीच की खाई और भी बढ़ने के संकेत दिए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की नई रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार एआई के लाभ केवल अमीर देशों तक ही सीमित रहेंगे। दुनिया भर में लाखों लोग जिनके पास डिजिटल कौशल, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वे पीछे छूट जाएंगे।
  • विशेष रूप से एआई (AI) और आधुनिक उन्नत डेटा सेंटर के संदर्भ में, दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग हब अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और चीन में केंद्रित हैं। अकेले अमेरिका के पास वैश्विक एआई डेटा सेंटर क्षमता और कुल सेंटरों का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसके बाद चीन का स्थान है।
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