अब फोटो से लोकेशन छिपाना मुश्किल: बिना GPS डेटा के भी आपका एड्रेस ढूंढ लेगा यह नया AI टूल, बरतें ये सावधानियां
GeoSpy AI Explained: क्या आप जानते हैं कि आपकी सोशल मीडिया फोटो अब आपके घर का पता बता सकती है? GeoSpy AI नाम का एक नया टूल बिना किसी मेटाडेटा या जीपीएस लोकेशन के, सिर्फ फोटो के बैकग्राउंड को स्कैन करके सटीक लोकेशन बता रहा है। जहां यह पुलिस के लिए मददगार है, वहीं आम जनता के लिए प्राइवेसी का बड़ा खतरा बन चुका है। जानिए इसके बारे में विस्तार से....
विस्तार
आमतौर पर हम सोचते हैं कि अगर फोटो की लोकेशन सेटिंग्स बंद है, तो हम सुरक्षित हैं। लेकिन जियोस्पाई एआई ने इस धारणा को बदल दिया है। यह टूल विजुअल जियोलोकेशन तकनीक पर काम करता है। यह फोटो में मौजूद लैंडमार्क, आर्किटेक्चरल स्टाइल, वनस्पति (पेड़-पौधे) और यहां तक कि बिजली के खंभों के डिजाइन का मिलान अपने विशाल डेटाबेस से करता है और पलक झपकते ही बता देता है कि फोटो दुनिया के किस कोने में ली गई है।
कैसे काम करता है यह टूल?
जियोस्पाई एआई विज़ुअल रिकग्निशन और मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग करता है। ये लाखों सार्वजनिक इमेज डाटा से ट्रेन किया गया है, जो बैकग्राउंड पैटर्न को ग्लोबल डेटाबेस से मैच करता है। ये आर्किटेक्चर और पर्यावरण संकेतों से क्षेत्र का अनुमान लगाता है। इसमें सबसे खास बात ये है कि इसे किसी मेटाडेटा या GPS डेटा की जरूरत नहीं पड़ती।
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क्या पहले से इस्तेमाल में है यह तकनीक?
यह टूल कोई रातों-रात नहीं आया है। ये मूल रूप से जांच एजेंसियों की मदद के लिए विकसित किया गया था, अमेरिका में कई जांच एजेंसियां और पुलिस बल इसका इस्तेमाल लंबे समय से कर रहे हैं। कंपनी का दावा है कि इसकी मदद से अब तक 10 हजार से ज्यादा पेचीदा केस सुलझाए जा चुके हैं। खासकर उन मामलों में जहां अपराधियों के पास से केवल तस्वीरें बरामद हुई थीं और उनकी लोकेशन का कोई सुराग नहीं था।
चिंता क्यों बढ़ी?
जैसा की ऊपर बताया गया कि इसके जांच एजेंसियों की मदद के लिए बनाया गया है, लेकिन फायदे के साथ जोखिम भी आता है। जैसे अगर ऐसी टेक्नोलॉजी आम लोगों की पहुंच में आ जाती है, तो संभावित खतरे हो सकते हैं:
- सोशल मीडिया से फोटो उठाकर किसी की लोकेशन ट्रेस करना।
- स्टॉकिंग या उत्पीड़न के मामलों में दुरुपयोग करना।
- सेलिब्रिटी या आम यूजर की प्राइवेसी खतरे में पड़ना।
- घर या नियमित स्थान की पहचान होना।
एक्सपर्ट मानते हैं कि यह विज़ुअल डॉक्सिंग का नया रूप बन सकता है।
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खुद को कैसे बचाएं?
एक्सपर्ट कहते हैं कि एआई से बचना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। कुछ सावधानियां बरत कर इनसे बचा जा सकता है। जैसे:
- बैकग्राउंड का ध्यान रखें: घर के अंदर या निजी जगहों पर फोटो लेते समय खिड़की से बाहर का दृश्य या विशिष्ट पहचान वाली चीजें कवर न करें।
- ब्लर (Blur) टूल का उपयोग: फोटो शेयर करने से पहले बैकग्राउंड को हल्का ब्लर कर दें ताकि एआई लैंडमार्क को पहचान न सके।
- देरी से पोस्ट करें: अपनी रियल-टाइम लोकेशन के बजाय, वहां से निकलने के बाद फोटो अपलोड करें।
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