{"_id":"6a7c3a9297abc78a1104962b","slug":"why-independence-day-is-celebrated-on-15th-august-know-interesting-facts-2026-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Independence Day 2026: 15 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस? जानिए क्या है इसके पीछे की असली वजह","category":{"title":"Utility","title_hn":"जरूरत की खबर","slug":"utility"}}
Independence Day 2026: 15 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस? जानिए क्या है इसके पीछे की असली वजह
Wed, 12 Aug 2026 03:40 PM IST
संकल्प प्रकाश सिंह
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संकल्प प्रकाश सिंह
Updated Wed, 12 Aug 2026 03:40 PM IST
सार
Why independence day is celebrated on 15th august: कई लोग अक्सर इस बारे में सवाल करते हैं कि आखिर 15 अगस्त को ही क्यों स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है? क्या इसके पीछे कोई खास वजह है?
विज्ञापन
Why Independence Day Is Celebrated On 15th August
- फोटो : AI Generated
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Indepence Day 2026: 15 अगस्त, 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा झंडा फहराएंगे। अक्सर कई लोगों का यह सवाल रहता है कि आखिर 15 अगस्त को ही क्यों स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है? आखिर 15 अगस्त के दिन ही देश क्यों आजाद हुआ था? क्या इसके पीछे कोई खास वजह है?
विज्ञापन
20 फरवरी, 1947 को ब्रिटेन के उस वक्त के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने एक ऐतिहासिक घोषणा की थी, उन्होंने कहा था कि ब्रिटिश हुकूमत 30 जून 1948 तक सत्ता का हस्तांतरण भारतीय हाथों में कर देगी। ऐसे में भारत को आजादी मिलने का समय 1948 के मध्य में था।
विज्ञापन
हालांकि, उस समय में देश की स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। श्रमिक अंदोलन, विद्रोह और लोगों के बीच बढ़ते असंतोष ने ब्रिटिश हुकूमत को 10 महीने पहले ही देश से शासन छोड़ने पर मजबूर कर दिया। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस आदि नायकों के नेतृत्व में देश एकजुट हो रहा था।
विज्ञापन
1942 में देश ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की। इस आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वहीं दूसरे विश्वयुद्ध के खत्म होने के बाद तक देश ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट हो चुका था। इन सब को देखते हुए ब्रिटिश सरकार यह जान चुकी थी कि भारत में ज्यादा दिन तक शासन चलाना संभव नहीं है।
इसी बीच मार्च 1947 में लॉर्ड लुई माउंटबेटन को भारत के आखिरी वायसराय बनाकर भेजा जाता है। इनको यह जिम्मेदारी दी गई थी कि सत्ता का हस्तांतरण ठीक ढंग से भारत को करना था। उनके पास इस कार्य को करने के लिए करीब डेढ़ साल साल का समय था। हालांकि, देश में स्थिति जिस तेजी से खराब हो रही थी उसे देखते हुए माउंटबेटन को यह पता चल गया था कि अगर सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने में ज्यादा समय लगा तो स्थिति खराब हो सकती है।
इसी बीच 3 जून 1947 को यह योजना बनाई गई कि ब्रिटिश सरकार भारत को दो हिस्सों भारत और पाकिस्तान में बांटेगी। इस फैसले को कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने स्वीकार किया। जुलाई 1947 में ब्रिटिस संसद ने भारत के स्वतंत्रता अधिनियम को पास किया। इसमें यह तय किया गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र देश बनेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 15 अगस्त को देश आजाद करने का फैसला लॉर्ड माउंटबेटन का ही था। इसके पीछे की एक मुख्य वजह यह थी कि 15 अगस्त 1945 को जापान की सेना ने मित्र राष्ट्रों के समक्ष सरेंडर किया था। इसे उस समय विक्ट्री ओवर जापान डे के तौर पर मनाया गया था। यह माउंटबेटन की सैन्य जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी भी थी।