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Ayodhya News: हिंदू समाज से मांगी जाए माफी, जिम्मेदार अपने पदों से दे इस्तीफा
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 17 Jun 2026 10:06 PM IST
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महंत विवेक आचारी।
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दानराशि में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर संत समाज में भी गहरी नाराजगी दिखाई देने लगी है। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख संतों ने इस पूरे प्रकरण में दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नाका हनुमानगढ़ी के महंत महंत रामदास ने कहा कि अत्यंत पीड़ा हो रही है। इस मामले में जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जिम्मेदार लोगों को नैतिकता के आधार पर अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए और समस्त हिंदू समाज से माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल संत समाज ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों के हृदय को इससे ठेस पहुंची है। उन्होंने रामभक्तों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम की व्यवस्था में देर हो सकती है, अंधेर नहीं। जिसने भी आस्था के साथ छल किया है, उसे भगवान राम कभी क्षमा नहीं करेंगे। वहीं राम मंदिर आंदोलन के प्रत्यक्षदर्शी और संत महंत विवेक आचारी ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 से शुरू हुए आंदोलन में उनके पिता आचार्य नारायणाचारी ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई थी। वे रामचंद्र दास परमहंस के साथ मिलकर आंदोलन की आवाज बुलंद करते रहे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं आंदोलन और उससे जुड़े संघर्षों, यहां तक कि गोलीकांड के भी साक्षी रहे हैं।
महंत विवेक आचारी ने कहा कि मंदिर निर्माण के बाद ऐसा घटनाक्रम सामने आएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इस घटना से सनातन समाज की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। यदि दानराशि में गड़बड़ी या चोरी के आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों को ऐसा कठोर दंड मिलना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि केवल संत समाज ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों के हृदय को इससे ठेस पहुंची है। उन्होंने रामभक्तों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम की व्यवस्था में देर हो सकती है, अंधेर नहीं। जिसने भी आस्था के साथ छल किया है, उसे भगवान राम कभी क्षमा नहीं करेंगे। वहीं राम मंदिर आंदोलन के प्रत्यक्षदर्शी और संत महंत विवेक आचारी ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 से शुरू हुए आंदोलन में उनके पिता आचार्य नारायणाचारी ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई थी। वे रामचंद्र दास परमहंस के साथ मिलकर आंदोलन की आवाज बुलंद करते रहे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं आंदोलन और उससे जुड़े संघर्षों, यहां तक कि गोलीकांड के भी साक्षी रहे हैं।
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महंत विवेक आचारी ने कहा कि मंदिर निर्माण के बाद ऐसा घटनाक्रम सामने आएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इस घटना से सनातन समाज की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। यदि दानराशि में गड़बड़ी या चोरी के आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों को ऐसा कठोर दंड मिलना चाहिए।