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अयोध्या: राम मंदिर के सीईओ की रेस में राजेश पांडेय सबसे आगे, परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र का दावा भी मजबूत

Wed, 02 Sep 2026 03:59 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 02 Sep 2026 03:59 PM IST
सार

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे है। वहीं, परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र का दावा भी मजबूत है। ट्रस्ट की बैठक में एक नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है।

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Ayodhya: Rajesh Pandey leads the race for Ram Mandir CEO
राजेश पांडेय सीईओ की रेस में सबसे आगे। - फोटो : amar ujala

विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति पर अब निर्णायक घड़ी आ गई है। सीईओ पद के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी थी। ट्रस्ट की अहम बैठक में अंतिम नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है। इस पूरी कवायद के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर उभरकर सामने आया है। राजेश पांडेय की दावेदारी को खास बनाने वाली बात सिर्फ उनका पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के ट्रस्ट के सचिव भी हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का उनका प्रत्यक्ष अनुभव राम मंदिर सीईओ की जिम्मेदारी के लिए उनकी प्रोफाइल को अलग वजन देता है।

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5,585 आवेदनों से शुरू हुई दौड़
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए देशभर से आवेदन मांगे थे। इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवार अंतिम चरण तक पहुंचे। इन उम्मीदवारों के साथ ऑनलाइन बातचीत के बाद 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू हुए। सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों को नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक अनुभव, प्रबंधन कौशल, ईमानदारी और भविष्य की कार्ययोजना जैसे मानकों पर परखा। इसके बाद कमेटी ने तीन नामों का अंतिम पैनल तैयार कर अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। हालांकि इन तीन नामों का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है।
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राजेश पांडेय पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
अंतिम फैसला भले ही ट्रस्ट को करना है, लेकिन सीईओ पद की चर्चाओं में राजेश पांडेय लगातार सबसे आगे बताए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे पांडेय को पुलिस सेवा के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने वाले अधिकारी के तौर पर पहचान मिली। राम मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, वीआईपी और आम श्रद्धालुओं की व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन जैसी कई जिम्मेदारियां सीईओ के सामने होंगी। यही वजह है कि सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र की जटिलताओं को करीब से समझने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास वजन मिल रहा है।

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परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र भी मजबूत नाम

राजेश पांडेय के अलावा बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी परेश सक्सेना का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल है। लंबे पुलिस और प्रशासनिक अनुभव के चलते उन्हें भी मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र भी इस दौड़ में हैं। वह जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी रह चुके हैं और जिला प्रशासन में बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को संभालने का अनुभव रखते हैं। इसके अलावा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में है। हालांकि सर्च कमेटी के अंतिम तीन नामों को लेकर ट्रस्ट की ओर से अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

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