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Ayodhya News: गरीबी को मात देकर मां-बेटी ने बुना आत्मनिर्भरता का ताना-बाना
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 28 Jan 2026 10:45 PM IST
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33- - महोबरा बाजार में गद्दे की सिलाई करती मां और बेटी- संवाद
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अयोध्या। अमानीगंज के पठान टोलिया की रहने वाली मां-बेटी ने मेहनत और हुनर के दम पर अपने को आत्मनिर्भर बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं। नसीम बानो और उनकी बेटी आफरीन बानो ने रजाई-गद्दे की सिलाई को आजीविका का जरिया बनाकर परिवार को आर्थिक तंगी से उबार रही हैं और समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
आफरीन बानो ने 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मां के साथ मिलकर स्वरोजगार का रास्ता चुना। पहले घर पर ही रजाई और गद्दे की सिलाई करना सीखा। उसके बाद काम ढूंढना शुरू किया। कुछ दिनों में उन्हें महोबरा बाजार में एक दुकान में काम मिल गया।
दोनों मां-बेटी घर से करीब चार किलोमीटर दूर महोबरा बाजार में नियमित रूप से सिलाई करने जाती हैं, जिससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है। सर्दियों के मौसम में रजाई की मांग बढ़ने से उनकी आमदनी में भी इजाफा होता है। इस समय दोनों मिलकर हर महीने करीब 20 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला यह परिवार अपने हौसलों से आत्मनिर्भर बनकर समाज की अन्य महिलाओं के लिए नजीर पेश कर रहा है।
अफरीन ने कहा कि पढ़ाई अधूरी रहने का मलाल जरूर है, लेकिन हुनर ने उन्हें आत्मसम्मान और पहचान दी है। इस काम से वह घर के खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें खुद पूरी कर पा रही हैं। नसीम बानो ने कहा कि बेटी को कोई न कोई हुनर जरूर सीखना चाहिए, ताकि मुश्किल हालात में वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
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आफरीन बानो ने 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मां के साथ मिलकर स्वरोजगार का रास्ता चुना। पहले घर पर ही रजाई और गद्दे की सिलाई करना सीखा। उसके बाद काम ढूंढना शुरू किया। कुछ दिनों में उन्हें महोबरा बाजार में एक दुकान में काम मिल गया।
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दोनों मां-बेटी घर से करीब चार किलोमीटर दूर महोबरा बाजार में नियमित रूप से सिलाई करने जाती हैं, जिससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है। सर्दियों के मौसम में रजाई की मांग बढ़ने से उनकी आमदनी में भी इजाफा होता है। इस समय दोनों मिलकर हर महीने करीब 20 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला यह परिवार अपने हौसलों से आत्मनिर्भर बनकर समाज की अन्य महिलाओं के लिए नजीर पेश कर रहा है।
अफरीन ने कहा कि पढ़ाई अधूरी रहने का मलाल जरूर है, लेकिन हुनर ने उन्हें आत्मसम्मान और पहचान दी है। इस काम से वह घर के खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें खुद पूरी कर पा रही हैं। नसीम बानो ने कहा कि बेटी को कोई न कोई हुनर जरूर सीखना चाहिए, ताकि मुश्किल हालात में वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
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