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Ayodhya News: अयोध्या में दोगुना हुआ रामलीला कलाकारों का मानदेय
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रामलीला का मंचन करते कलाकार।
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अयोध्या। रामनगरी की रामलीला परंपरा को सशक्त करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। रामलीला मंचन से जुड़े कलाकारों के मानदेय में दोगुना से भी अधिक की बढ़ोतरी की गई है। अब कलाकारों को रोजाना प्रति मंडली 17,500 रुपये मानदेय मिलेगा, जो अब तक 8,500 रुपये था। इतना ही नहीं, अनवरत रामलीला के सालाना बजट में भी बढ़ोतरी की गई है। इसे 40 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे मंचन की गुणवत्ता, तकनीकी संसाधनों, साज-सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और कलाकारों की सुविधाओं में व्यापक सुधार होगा।
अनवरत रामलीला की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। अगस्त 2015 में तत्कालीन सपा सरकार में बजट के अभाव में रामलीला का मंचन बंद हो गया। करीब पौने दो साल तक मंचन बंद रहा। 2017 में प्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो मंचन शुरू किया गया। रामलीला का मंचन जिस तुलसी स्मारक भवन में होता है वह अब पहले से अधिक सुसज्जित और संसाधन युक्त हो गया है।
अवध आदर्श रामलीला मंडली के अध्यक्ष महंत मनीष दास का कहना है कि यह फैसला नई पीढ़ी के कलाकारों को रामलीला से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा। बढ़ा हुआ मानदेय और बजट हमें अपनी कला को निखारने का अवसर देगा। अब मंचन और अधिक भव्य, आधुनिक और प्रभावशाली रूप में हो सकेगा। (संवाद)
राष्ट्रीय लीला मंडली को अलग दर से भुगतान
संस्थान के नियमों के मुताबिक मानदेय का भुगतान दो स्तर पर किया जा रहा है। कम अनुभव वाली लीला मंडली को 700 रुपये प्रति कलाकार व राष्ट्रीय लीला मंडली को एक हजार रुपये प्रति कलाकार मानदेय दिया जा रहा है। ऐसे में 25 कलाकारों की सामान्य लीला मंडली को 17500 रुपये प्रति दिन व राष्ट्रीय लीला मंडली को 25 हजार रुपये रोजाना दिया जाता है। इसके अलावा कलाकारों के रहने के लिए तुलसी स्मारक भवन की डॉरमेंट्री में व्यवस्था की जाती है। भोजन के लिए 300 रुपये रोजाना प्रति कलाकार की दर से दिया जाता है। जबकि पहले एकमुश्त 30 हजार रुपये ही दिए जाते थे।
सालाना 26 मंडलियों का होता है चयन
अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि रामलीला मंचन के लिए सालाना 26 रामलीला मंडलियों का चयन किया जाता है। हर माह के लिए दो रामलीला मंडली चयनित होती है, जो 15-15 दिन रामलीला का मंचन करती है। ऐसे में 12 महीने में 24 टीमें रामलीला मंचन करती हैं, दो अतिरिक्त टीमों का भी चयन किया जाता है।
परंपरा का सम्मान
अनवरत रामलीला मंचन के लिए सरकार ने बजट दोगुना कर परंपरा का सम्मान किया है। कलाकारों को अब दोगुना मानदेय दिया जा रहा है। उनके आवास की व्यवस्था बेहतर हुई है। भोजन का बजट करीब तीन गुना बढ़ा दिया गया है। अयोध्या की रामलीला अब और भव्य, सशक्त और प्रभावशाली रूप में रामकथा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी। -आशुतोष द्विवेदी, सलाहकार, अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान
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अनवरत रामलीला की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। अगस्त 2015 में तत्कालीन सपा सरकार में बजट के अभाव में रामलीला का मंचन बंद हो गया। करीब पौने दो साल तक मंचन बंद रहा। 2017 में प्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो मंचन शुरू किया गया। रामलीला का मंचन जिस तुलसी स्मारक भवन में होता है वह अब पहले से अधिक सुसज्जित और संसाधन युक्त हो गया है।
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अवध आदर्श रामलीला मंडली के अध्यक्ष महंत मनीष दास का कहना है कि यह फैसला नई पीढ़ी के कलाकारों को रामलीला से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा। बढ़ा हुआ मानदेय और बजट हमें अपनी कला को निखारने का अवसर देगा। अब मंचन और अधिक भव्य, आधुनिक और प्रभावशाली रूप में हो सकेगा। (संवाद)
राष्ट्रीय लीला मंडली को अलग दर से भुगतान
संस्थान के नियमों के मुताबिक मानदेय का भुगतान दो स्तर पर किया जा रहा है। कम अनुभव वाली लीला मंडली को 700 रुपये प्रति कलाकार व राष्ट्रीय लीला मंडली को एक हजार रुपये प्रति कलाकार मानदेय दिया जा रहा है। ऐसे में 25 कलाकारों की सामान्य लीला मंडली को 17500 रुपये प्रति दिन व राष्ट्रीय लीला मंडली को 25 हजार रुपये रोजाना दिया जाता है। इसके अलावा कलाकारों के रहने के लिए तुलसी स्मारक भवन की डॉरमेंट्री में व्यवस्था की जाती है। भोजन के लिए 300 रुपये रोजाना प्रति कलाकार की दर से दिया जाता है। जबकि पहले एकमुश्त 30 हजार रुपये ही दिए जाते थे।
सालाना 26 मंडलियों का होता है चयन
अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि रामलीला मंचन के लिए सालाना 26 रामलीला मंडलियों का चयन किया जाता है। हर माह के लिए दो रामलीला मंडली चयनित होती है, जो 15-15 दिन रामलीला का मंचन करती है। ऐसे में 12 महीने में 24 टीमें रामलीला मंचन करती हैं, दो अतिरिक्त टीमों का भी चयन किया जाता है।
परंपरा का सम्मान
अनवरत रामलीला मंचन के लिए सरकार ने बजट दोगुना कर परंपरा का सम्मान किया है। कलाकारों को अब दोगुना मानदेय दिया जा रहा है। उनके आवास की व्यवस्था बेहतर हुई है। भोजन का बजट करीब तीन गुना बढ़ा दिया गया है। अयोध्या की रामलीला अब और भव्य, सशक्त और प्रभावशाली रूप में रामकथा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी। -आशुतोष द्विवेदी, सलाहकार, अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान
