{"_id":"697a341beff43a40540ff666","slug":"identity-and-existence-are-in-danger-moving-towards-slavery-ayodhya-news-c-97-1-ayo1002-142019-2026-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: अस्मिता और अस्तित्व संकटग्रस्त, गुलामी की ओर हो रहे अग्रसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: अस्मिता और अस्तित्व संकटग्रस्त, गुलामी की ओर हो रहे अग्रसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 28 Jan 2026 09:36 PM IST
विज्ञापन
32- कालिकुलालयम आश्रम में बैठक में शामिल विप्र गण- संगठन
विज्ञापन
अयोध्या। कालिकुलालय टेढीबाजार में विप्र साधकों का वृहद समागम हुआ। गुप्त नवरात्र की अष्टमी तिथि के उपलक्ष्य में कन्या पूजन के अवसर पर जुटे विप्र साधकों ने विकास, तप-त्याग और संस्कार पर चर्चा की। यूजीसी को लेकर चल रहे घमासान के बीच विप्र साधकों के जमावड़े ने एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. रामानंद शुक्ल ने कहा कि अस्मिता और अस्तित्व दोनों संकट में है। विप्रों के नष्ट हो जाने पर सनातन समाज और सनातन राष्ट्र का नुकसान होगा। हम फिर गुलामी की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
अध्यक्षता करते हुए प्रो. हरिश्चंद्र मिश्र ने कहा कि सामाजिक जीवन की जीवंतता को बरकरार रखने के लिए हम सब समय-समय पर एक साथ बैठें, इससे परस्पर सद्भाव स्थापित होगा। विशिष्ट वक्ता डाॅ. हरिशचंद्र शुक्ल ने ब्राह्मणों की शास्त्रीय व्याख्या करते हुए द्विजों को देवतुल्य बताया। प्रधानाचार्य डाॅ. दिनेश द्विवेदी ने कहा कि ब्राह्मण जब तक पदासीन रहता है तब तक किसी ब्राह्मण की कोई मदद नहीं करता। अन्य ब्राह्मणों- साधकों के प्रति निःस्वार्थ भाव से यथोचित सहयोग की भावना होनी चाहिए। साहित्यकार हनुमान प्रसाद मिश्र ने भावी संस्था में पारदर्शिता पर बल दिया। इस दौरान प्रबंधक ओमप्रकाश ब्रह्मचारी, समाजसेवी नारायण मिश्र, अनिरुद्ध शुक्ल, होशियारपुर पंजाब से पधारे मनीष पांडेय, प्रतापगढ़ से पीयूष पांडेय, सुलतानपुर से विकास पांडेय, डाॅ. अभिषेक पांडेय, अंबेडकरनगर के दिलीप कुमार पांडेय, डाॅ. प्रभाकर पांडेय, लखनऊ से शैलेश द्विवेदी, गोंडा की सत्यवती द्विवेदी, सुरेशधर द्विवेदी, विपिन मिश्र सहित अन्य की मौजूदगी रही।
Trending Videos
अध्यक्षता करते हुए प्रो. हरिश्चंद्र मिश्र ने कहा कि सामाजिक जीवन की जीवंतता को बरकरार रखने के लिए हम सब समय-समय पर एक साथ बैठें, इससे परस्पर सद्भाव स्थापित होगा। विशिष्ट वक्ता डाॅ. हरिशचंद्र शुक्ल ने ब्राह्मणों की शास्त्रीय व्याख्या करते हुए द्विजों को देवतुल्य बताया। प्रधानाचार्य डाॅ. दिनेश द्विवेदी ने कहा कि ब्राह्मण जब तक पदासीन रहता है तब तक किसी ब्राह्मण की कोई मदद नहीं करता। अन्य ब्राह्मणों- साधकों के प्रति निःस्वार्थ भाव से यथोचित सहयोग की भावना होनी चाहिए। साहित्यकार हनुमान प्रसाद मिश्र ने भावी संस्था में पारदर्शिता पर बल दिया। इस दौरान प्रबंधक ओमप्रकाश ब्रह्मचारी, समाजसेवी नारायण मिश्र, अनिरुद्ध शुक्ल, होशियारपुर पंजाब से पधारे मनीष पांडेय, प्रतापगढ़ से पीयूष पांडेय, सुलतानपुर से विकास पांडेय, डाॅ. अभिषेक पांडेय, अंबेडकरनगर के दिलीप कुमार पांडेय, डाॅ. प्रभाकर पांडेय, लखनऊ से शैलेश द्विवेदी, गोंडा की सत्यवती द्विवेदी, सुरेशधर द्विवेदी, विपिन मिश्र सहित अन्य की मौजूदगी रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
