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Ayodhya News: 15 अगस्त से पीतांबरी में नजर आएंगे अर्चक
Thu, 13 Aug 2026 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:57 PM IST
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की पूजा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब रामलला की सेवा में लगे सभी अर्चक एक समान ड्रेस में नजर आएंगे। नई व्यवस्था के तहत 15 अगस्त से सभी अर्चकों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। हालांकि ड्रेस कोड पहले से लागू है, लेकिन इसमें थोड़ा बदलाव किया गया है।
धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार सभी अर्चक पीत (पीले) रंग के बिना सिले (उत्तरीय) रेशमी वस्त्र धारण करेंगे। इससे पहले भी पीत व भगवा रंग के वस्त्र पहनने का नियम लागू था, लेकिन अब अर्चक केवल पीतांबरी ही धारण करेंगे।
गर्मी के मौसम में अर्चक नीचे धोती और ऊपर उत्तरीय वस्त्र पहनेंगे। वहीं शरद और सर्द मौसम में आवश्यकता के अनुसार ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि मौसम बदलने पर भी वस्त्रों का रंग पीत ही रहेगा। यह वस्त्र अर्चकों को राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।
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इन पर राम मंदिर ट्रस्ट का लोगो भी अंकित होगा। धार्मिक समिति का मानना है कि पूजा-अर्चना की शुचिता और परंपराओं के अनुरूप बिना सिले रेशमी एवं ऊनी वस्त्र अधिक उपयुक्त हैं। एक समान वेशभूषा से मंदिर की पूजा व्यवस्था में एकरूपता भी दिखाई देगी।
इनसेट
चार बजे निकलेगी रामलला की पालकी यात्रा
वहीं राम मंदिर में झूलनोत्सव की तैयारियों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। 15 अगस्त को दोपहर चार बजे राम मंदिर से कुबेर टीला तक रामलला की पालकी यात्रा निकाली जाएगी। राम मंदिर में धार्मिक आयोजनों के व्यवस्था प्रमुख इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि पालकी यात्रा अयोध्या की परंपरा के अनुरूप भव्यता पूर्वक निकाली जाएगी। यात्रा कुबेर टीला तक जाएगी, पहले दिन यहीं झूलनोत्सव होगा। इसके बाद 16 अगस्त से 28 अगस्त तक रामलला मंदिर के गर्भगृह में झूले पर विराजमान होकर दर्शन देंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों व भक्ताें को प्रसाद वितरण की भी तैयारी की गई है।
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धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार सभी अर्चक पीत (पीले) रंग के बिना सिले (उत्तरीय) रेशमी वस्त्र धारण करेंगे। इससे पहले भी पीत व भगवा रंग के वस्त्र पहनने का नियम लागू था, लेकिन अब अर्चक केवल पीतांबरी ही धारण करेंगे।
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गर्मी के मौसम में अर्चक नीचे धोती और ऊपर उत्तरीय वस्त्र पहनेंगे। वहीं शरद और सर्द मौसम में आवश्यकता के अनुसार ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि मौसम बदलने पर भी वस्त्रों का रंग पीत ही रहेगा। यह वस्त्र अर्चकों को राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।
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इन पर राम मंदिर ट्रस्ट का लोगो भी अंकित होगा। धार्मिक समिति का मानना है कि पूजा-अर्चना की शुचिता और परंपराओं के अनुरूप बिना सिले रेशमी एवं ऊनी वस्त्र अधिक उपयुक्त हैं। एक समान वेशभूषा से मंदिर की पूजा व्यवस्था में एकरूपता भी दिखाई देगी।
इनसेट
चार बजे निकलेगी रामलला की पालकी यात्रा
वहीं राम मंदिर में झूलनोत्सव की तैयारियों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। 15 अगस्त को दोपहर चार बजे राम मंदिर से कुबेर टीला तक रामलला की पालकी यात्रा निकाली जाएगी। राम मंदिर में धार्मिक आयोजनों के व्यवस्था प्रमुख इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि पालकी यात्रा अयोध्या की परंपरा के अनुरूप भव्यता पूर्वक निकाली जाएगी। यात्रा कुबेर टीला तक जाएगी, पहले दिन यहीं झूलनोत्सव होगा। इसके बाद 16 अगस्त से 28 अगस्त तक रामलला मंदिर के गर्भगृह में झूले पर विराजमान होकर दर्शन देंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों व भक्ताें को प्रसाद वितरण की भी तैयारी की गई है।