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Ayodhya News: धर्म सुरक्षित रहेगा, तभी राष्ट्र सुरक्षित रहेगा
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 28 Mar 2026 08:49 PM IST
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राजघाट पर आयोजित महायज्ञ के समापन पर आयोजित संत सम्मेलन में जुटे संत-धर्माचार्य।
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अयोध्या। रामनगरी के राजघाट पर पूज्य जीयर स्वामी के सानिध्य में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का शनिवार को अत्यंत श्रद्धा और वैदिक रीति-विधानों के साथ भव्य समापन हुआ। यज्ञ के अंतिम दिवस लगभग 5000 यजमानों ने एक साथ आहुति देकर पूर्णाहुति संपन्न की। इस अवसर पर आयोजित धर्म सम्मेलन में देश भर से जुटे धर्माचार्यों ने संदेश दिया कि धर्म सुरक्षित रहेगा तभी राष्ट्र सुरक्षित रहेगा।
चिन्ना जीयर स्वामी ने कहा कि राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए धर्म का ज्ञान आवश्यक है और यह ज्ञान संत समागम एवं यज्ञ के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज धर्म को नहीं समझेगा, तब तक राष्ट्र की सच्ची रक्षा संभव नहीं है। साधन और संसाधन तभी सार्थक होते हैं जब उनके साथ संस्कार जुड़े हों, अन्यथा वे बोझ बन जाते हैं। गादी स्वामी ने कहा कि अयोध्या जैसी पवित्र भूमि पर इस प्रकार के यज्ञ का आयोजन अत्यंत पुण्यदायी है। जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ ने धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला।
इससे पहले परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने संतों का सम्मान किया। संचालन अयोध्यानाथ स्वामी ने किया। सम्मेलन में प्रमुख रूप से अहोविल जीयर स्वामी , चिन्ना जीयर स्वामी , विलूपुनूर जीयर स्वामी , जगद्गुरु वल्लभाचार्य, द्वारकेश लाल , डॉ. संत स्वामी , श्रुति प्रकाश , शुभम बलराम दास , वरदराजन महाराज, आत्मानंद महाराज सहित सैकड़ों संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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चिन्ना जीयर स्वामी ने कहा कि राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए धर्म का ज्ञान आवश्यक है और यह ज्ञान संत समागम एवं यज्ञ के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज धर्म को नहीं समझेगा, तब तक राष्ट्र की सच्ची रक्षा संभव नहीं है। साधन और संसाधन तभी सार्थक होते हैं जब उनके साथ संस्कार जुड़े हों, अन्यथा वे बोझ बन जाते हैं। गादी स्वामी ने कहा कि अयोध्या जैसी पवित्र भूमि पर इस प्रकार के यज्ञ का आयोजन अत्यंत पुण्यदायी है। जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ ने धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला।
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इससे पहले परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने संतों का सम्मान किया। संचालन अयोध्यानाथ स्वामी ने किया। सम्मेलन में प्रमुख रूप से अहोविल जीयर स्वामी , चिन्ना जीयर स्वामी , विलूपुनूर जीयर स्वामी , जगद्गुरु वल्लभाचार्य, द्वारकेश लाल , डॉ. संत स्वामी , श्रुति प्रकाश , शुभम बलराम दास , वरदराजन महाराज, आत्मानंद महाराज सहित सैकड़ों संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही।