UP: केंद्र व आरएसएस की निगरानी में होगा पहले सीईओ का चयन, इंटरव्यू में मांगा गया विजन डॉक्यूमेंट-दो रेफरेंस
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक सीईओ के चयन में प्रशासनिक अनुभव के साथ नेतृत्व क्षमता, कार्ययोजना और भविष्य की दृष्टि को परखा जा रहा है। उम्मीदवारों से विजन डॉक्यूमेंट और दो रेफरेंस मांगे गए हैं। अंतिम चयन में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहमति महत्वपूर्ण बताई जा रही है।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन की प्रक्रिया में केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की दृष्टि, नेतृत्व क्षमता और विश्वसनीयता को भी प्रमुख आधार बनाया गया है।
साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के भविष्य के विकास को लेकर उनका विजन डॉक्यूमेंट, विस्तृत कार्ययोजना और ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत करने को कहा गया।
पृष्ठभूमि का परीक्षण किया जा सके
सूत्रों के अनुसार, इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों से उनकी विशेष या असाधारण उपलब्धियों का विवरण भी मांगा गया। इसके साथ ही उनके कार्य और व्यक्तित्व के सत्यापन के लिए पेशेवर, सामाजिक या धार्मिक क्षेत्र के दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नाम और संपर्क विवरण रेफरेंस के रूप में भी लिए गए, ताकि पृष्ठभूमि का परीक्षण किया जा सके।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, सीईओ पद के लिए अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की निगरानी में लिया जाएगा। ट्रस्ट की चयन समिति पहले तीन नामों का पैनल तैयार करेगी, जिसके बाद अंतिम चयन पर केंद्र सरकार और संघ की सहमति महत्वपूर्ण होगी।
दीर्घकालिक विजन को भी परखा जा रहा
सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट ऐसे अधिकारी की तलाश में है, जो आस्था, प्रशासनिक दक्षता और संगठनात्मक क्षमता के बीच संतुलन स्थापित कर सके। इसी कारण चयन प्रक्रिया में केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार की कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता, धार्मिक और सामाजिक समझ तथा दीर्घकालिक विजन को भी परखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में सीईओ कार्यालय में होने वाली प्रमुख नियुक्तियों और प्रशासनिक ढांचे के गठन में भी केंद्र सरकार और आरएसएस की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है।