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Ghazipur News: 3767 मरीजों का इलाज पर ब्रेन और हार्ट सर्जरी के लिए अब भी वाराणसी की दौड़
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शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज के नवनिर्मित अस्पताल। संवाद
गाजीपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब मरीजों को पांच लाख रुपये तक के निशुल्क उपचार की सुविधा देने का प्रावधान है, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जिले के मरीजों को अब भी वाराणसी का रुख करना पड़ रहा है। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जनवरी से 21 अक्तूबर तक 3767 आयुष्मान कार्डधारकों का उपचार किया गया। इनमें 131 मेजर सर्जरी शामिल हैं। इसके बावजूद ब्रेन हेमरेज और हृदय की सर्जरी की जरूरत वाले मरीजों को स्थानीय स्तर पर सुविधा नहीं मिल पा रही है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा के अनुसार, ऐसे करीब 50 मरीजों को दस माह में वाराणसी रेफर किया गया। यानी हर माह औसतन पांच मरीजों को रेफर करना पड़ा। इन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड था, लेकिन उन्हें मेडिकल कॉलेज में संबंधित सर्जरी की सुविधा नहीं मिल सकी। प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में हड्डी, आंख, न्यूरो, जनरल और स्पाइन संबंधी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, ब्रेन और हृदय की सर्जरी के लिए विशेषज्ञों की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को दूसरे शहर भेजना पड़ता है। हृदय रोग का सामान्य उपचार मेडिकल कॉलेज में हो जाता है, लेकिन सर्जरी के लिए मरीजों को वाराणसी रेफर किया जाता है। ब्रेन हेमरेज के मामलों में भी यही स्थिति है।
पुरुष अस्पताल में 2674, महिला अस्पताल में 1093 मरीजों का उपचार
मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से 21 अक्तूबर तक पुरुष अस्पताल में 2674 आयुष्मान कार्डधारकों का उपचार हुआ। इनमें गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की 131 मेजर सर्जरी भी शामिल हैं। वहीं, मिश्रबाजार स्थित महिला अस्पताल में 1093 कार्डधारकों का उपचार किया गया। इनमें 540 महिलाओं की सर्जरी हुई।
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गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज के नवनिर्मित 300 बेड के अस्पताल और 200 बेड के पुरुष अस्पताल में हड्डी, आंख, न्यूरो, जनरल और डेंटल संबंधी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। न्यूरो सर्जरी विभाग में स्पाइन संबंधी सर्जरी भी की जाती है। इसके बावजूद ब्रेन और हृदय की सर्जरी के लिए मरीजों को वाराणसी पर निर्भर रहना पड़ता है।
ब्रेन और हृदय की सर्जरी से संबंधित एक या दो मरीज सप्ताह में आते हैं। विशेषज्ञों की उपलब्धता नहीं होने के कारण उन्हें वाराणसी रेफर करना पड़ता है। दस माह में ऐसे करीब 50 मरीजों को रेफर किया गया है। - प्रो. आनंद मिश्रा, प्राचार्य
डायलिसिस के लिए ग्राउंड फ्लोर पर लगेंगी पांच मशीनें
गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों को सहूलियत देने के लिए पुरुष अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर डायलिसिस की पांच मशीनें स्थापित करने की तैयारी है। ब्लड बैंक से आगे खाली हुए जांच केंद्र के कक्ष में ये मशीनें लगाई जाएंगी। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। इससे आयुष्मान कार्डधारकों को डायलिसिस के लिए अस्पताल की ऊपरी मंजिल तक जाने से राहत मिलेगी। प्राचार्य ने बताया कि एक वर्ष में 5460 आयुष्मान कार्डधारकों की डायलिसिस हो चुकी है। नई व्यवस्था से मरीजों को सुविधा मिलेगी। जिले में करीब 10 लाख 31 हजार 574 आयुष्मान कार्डधारक हैं। इनके उपचार के लिए 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज के अस्पताल योजना से संबद्ध हैं।
30 फीसदी मामलों में आधार में नाम की गड़बड़ी से भुगतान अटका
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारकों के उपचार का करीब 70 प्रतिशत भुगतान शासन की ओर से हो चुका है। वहीं, करीब 30 प्रतिशत मामलों में भुगतान नहीं हो सका है। प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि कई कार्डधारकों के आधार कार्ड में नाम गलत होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया अटक रही है। आधार में नाम का सुधार होने के बाद शासन की ओर से भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। 300 बेड के नवनिर्मित अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर आयुष्मान कार्डधारकों की सहायता के लिए काउंटर स्थापित है, जहां आयुष्मान मित्र तैनात हैं। एमआरआई जांच की सुविधा भी कार्डधारकों के लिए निशुल्क है। प्राचार्य के अनुसार, आयुष्मान मरीजों की सर्जरी के लिए अलग काउंटर बनाया गया है। यहां से मरीजों को चिकित्सक के पास भेजा जाता है। जांच के बाद प्रयास रहता है कि पात्र मरीज को उसी दिन भर्ती कर सर्जरी की सुविधा दी जाए।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा के अनुसार, ऐसे करीब 50 मरीजों को दस माह में वाराणसी रेफर किया गया। यानी हर माह औसतन पांच मरीजों को रेफर करना पड़ा। इन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड था, लेकिन उन्हें मेडिकल कॉलेज में संबंधित सर्जरी की सुविधा नहीं मिल सकी। प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में हड्डी, आंख, न्यूरो, जनरल और स्पाइन संबंधी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, ब्रेन और हृदय की सर्जरी के लिए विशेषज्ञों की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को दूसरे शहर भेजना पड़ता है। हृदय रोग का सामान्य उपचार मेडिकल कॉलेज में हो जाता है, लेकिन सर्जरी के लिए मरीजों को वाराणसी रेफर किया जाता है। ब्रेन हेमरेज के मामलों में भी यही स्थिति है।
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पुरुष अस्पताल में 2674, महिला अस्पताल में 1093 मरीजों का उपचार
मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से 21 अक्तूबर तक पुरुष अस्पताल में 2674 आयुष्मान कार्डधारकों का उपचार हुआ। इनमें गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की 131 मेजर सर्जरी भी शामिल हैं। वहीं, मिश्रबाजार स्थित महिला अस्पताल में 1093 कार्डधारकों का उपचार किया गया। इनमें 540 महिलाओं की सर्जरी हुई।
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गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज के नवनिर्मित 300 बेड के अस्पताल और 200 बेड के पुरुष अस्पताल में हड्डी, आंख, न्यूरो, जनरल और डेंटल संबंधी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। न्यूरो सर्जरी विभाग में स्पाइन संबंधी सर्जरी भी की जाती है। इसके बावजूद ब्रेन और हृदय की सर्जरी के लिए मरीजों को वाराणसी पर निर्भर रहना पड़ता है।
ब्रेन और हृदय की सर्जरी से संबंधित एक या दो मरीज सप्ताह में आते हैं। विशेषज्ञों की उपलब्धता नहीं होने के कारण उन्हें वाराणसी रेफर करना पड़ता है। दस माह में ऐसे करीब 50 मरीजों को रेफर किया गया है। - प्रो. आनंद मिश्रा, प्राचार्य
डायलिसिस के लिए ग्राउंड फ्लोर पर लगेंगी पांच मशीनें
गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों को सहूलियत देने के लिए पुरुष अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर डायलिसिस की पांच मशीनें स्थापित करने की तैयारी है। ब्लड बैंक से आगे खाली हुए जांच केंद्र के कक्ष में ये मशीनें लगाई जाएंगी। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। इससे आयुष्मान कार्डधारकों को डायलिसिस के लिए अस्पताल की ऊपरी मंजिल तक जाने से राहत मिलेगी। प्राचार्य ने बताया कि एक वर्ष में 5460 आयुष्मान कार्डधारकों की डायलिसिस हो चुकी है। नई व्यवस्था से मरीजों को सुविधा मिलेगी। जिले में करीब 10 लाख 31 हजार 574 आयुष्मान कार्डधारक हैं। इनके उपचार के लिए 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज के अस्पताल योजना से संबद्ध हैं।
30 फीसदी मामलों में आधार में नाम की गड़बड़ी से भुगतान अटका
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारकों के उपचार का करीब 70 प्रतिशत भुगतान शासन की ओर से हो चुका है। वहीं, करीब 30 प्रतिशत मामलों में भुगतान नहीं हो सका है। प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि कई कार्डधारकों के आधार कार्ड में नाम गलत होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया अटक रही है। आधार में नाम का सुधार होने के बाद शासन की ओर से भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। 300 बेड के नवनिर्मित अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर आयुष्मान कार्डधारकों की सहायता के लिए काउंटर स्थापित है, जहां आयुष्मान मित्र तैनात हैं। एमआरआई जांच की सुविधा भी कार्डधारकों के लिए निशुल्क है। प्राचार्य के अनुसार, आयुष्मान मरीजों की सर्जरी के लिए अलग काउंटर बनाया गया है। यहां से मरीजों को चिकित्सक के पास भेजा जाता है। जांच के बाद प्रयास रहता है कि पात्र मरीज को उसी दिन भर्ती कर सर्जरी की सुविधा दी जाए।