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Ghazipur News: रहमतुल्लाह अलैह का 60 वां सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया गया
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जमानिया स्टेशन स्थित हजरत मुस्तकीम शाह बाबा के मजार पर चादरपोसी करते जायरिन। संवाद
स्टेशन बाजार पटखौलिया स्थित कब्रिस्तान में हजरत मुस्तकीम शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का 60 वां सालाना उर्स-ए-मुबारक शुक्रवार को पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। इस मौके पर सैकड़ों जायरीन पहुंचे। चादरपोशी, फातिहा ख्वानी, महफिल-ए-समा और दुआ के बीच अकीदतमंदों ने बाबा की मजार पर हाजिरी लगाई।
उर्स के सिलसिले में शुक्रवार दोपहर तीन बजे डॉ. जाने आलम खान की दुकान से पारंपरिक चादर-गागर का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस रेलवे फाटक, गांधी चौक और स्टेशन रोड होते हुए गल्ला मंडी स्थित हजरत सूफी मोहम्मद फखरुद्दीन नियाजी की दुकान पर पहुंचा, जहां महफिल-ए-समा का आयोजन हुआ।
वहां से चादर लेकर जायरीन सब्जी मंडी के रास्ते पटखौलिया स्थित बाबा की मजार पर पहुंचे। मगरिब की नमाज के बाद मजार-ए-मुकद्दस पर अकीदत के साथ चादरपोशी की गई और फातिहा ख्वानी के बाद मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ मांगी गई। डॉ. जाने आलम खान ने कहा कि उर्स केवल एक मजहबी रस्म नहीं, बल्कि सूफी परंपरा, इंसानियत, खिदमत-ए-खल्क और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
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ऐसे आयोजन समाज में आपसी मोहब्बत और मजहबी सद्भाव को मजबूती प्रदान करते हैं। चादरपोशी, लंगर और कव्वाली के माध्यम से लोगों तक भाईचारे और एकजुटता का संदेश पहुंचता है। इस मौके पर डॉ. जाने आलम खान, मो. सलीम नियाजी, मो. इम्तियाज, मो. अशरफ, डॉ. सुल्तान, मो. जावेद अनवर, जावेद खान, भोला मौजूद रहे।
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उर्स के सिलसिले में शुक्रवार दोपहर तीन बजे डॉ. जाने आलम खान की दुकान से पारंपरिक चादर-गागर का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस रेलवे फाटक, गांधी चौक और स्टेशन रोड होते हुए गल्ला मंडी स्थित हजरत सूफी मोहम्मद फखरुद्दीन नियाजी की दुकान पर पहुंचा, जहां महफिल-ए-समा का आयोजन हुआ।
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वहां से चादर लेकर जायरीन सब्जी मंडी के रास्ते पटखौलिया स्थित बाबा की मजार पर पहुंचे। मगरिब की नमाज के बाद मजार-ए-मुकद्दस पर अकीदत के साथ चादरपोशी की गई और फातिहा ख्वानी के बाद मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ मांगी गई। डॉ. जाने आलम खान ने कहा कि उर्स केवल एक मजहबी रस्म नहीं, बल्कि सूफी परंपरा, इंसानियत, खिदमत-ए-खल्क और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
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ऐसे आयोजन समाज में आपसी मोहब्बत और मजहबी सद्भाव को मजबूती प्रदान करते हैं। चादरपोशी, लंगर और कव्वाली के माध्यम से लोगों तक भाईचारे और एकजुटता का संदेश पहुंचता है। इस मौके पर डॉ. जाने आलम खान, मो. सलीम नियाजी, मो. इम्तियाज, मो. अशरफ, डॉ. सुल्तान, मो. जावेद अनवर, जावेद खान, भोला मौजूद रहे।