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सड़क हादसे : देश के टॉप-100 जिलों में जौनपुर, पांच साल में 1810 लोगों की मौत

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:53 AM IST
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Road accidents: Jaunpur among the top 100 districts in the country, 1810 people died in five years
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जौनपुर। जनपद में सबसे पिछले पांच सालों में सड़क हादसे काफी बढ़ गए हैं। जौनपुर देश के उन सौ जिलों में शामिल हो गया है, जहां सबसे ज्यादा सड़क हादसों में लोगों की मौतें होतीं हैं। इस मामले में जौनपुर जिला देश में 88वें स्थान पर है। यहां पांच साल के आंकड़ों पर गौर करें तो 1810 लोगों की जान गई है, जिसमें पिछले साल ही 425 लोगों की जान गई थी। सरकार सड़क दुर्घटनाओं को कम करने को लेकर चितिंत है। वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 फीसदी तक की कमी लाने की कोशिश में परिवहन विभाग लगा हुआ है। इसके लिए जीरो फैटिलिटी की कार्ययोजना बना रही है। बावजूद इसके जिले में रोजाना सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। एआरटीओ सत्येंद्र कुमार की मानें तो जनपद देश के उन टॉप-100 जिलों में शामिल है, जहां सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं। इस मामले में जनपद देश में 88वें स्थान पर है। अधिक सड़क हादसे वाले जिलों की बात करें तो बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा जैसे जनपद शामिल हैं। इन जिलों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को शून्य पर लाने के लिए इन्हें ‘जीरो फैटिलिटी’ जिला घोषित किया गया है। एक से 31 जनवरी तक रैली, मैराथन और सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनपद में वर्ष 2021 से लेकर 31 दिसंबर तक 1161 स्थानों पर सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1810 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 90 फीसदी मौत ओवरस्पीड के कारण हाईवे पर हुए हैं। जिले के 23 स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। जहां पिछले तीन साल में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें हौज, सिरकोनी, नेवादा हाईवे, फतेजगंज, सिकरारा बाजार, टेकारी, खाखोपुर, पवारा, सतहरिया, पचहटिया, जेसीज चौराहा, धनियामऊ, शिवगुलामगंज, लखनऊवां, सरोखनपुर, मिरदाशपुर, सिपाह, सिद्दीकपुर, लपरी, पूर्वांचल, मुरैनी, चंदवक बाजार, बिथार शामिल हैं। ट्रैफिक नियमों को लेकर जिले के कुछ लोग गंभीर नहीं हैं। यातायात विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में 93,349 वाहन चालकों को नियमों के उल्लंघन करते पकड़ा गया। इनसे एक करोड़ 78 हजार 40 रुपये चालान के भी जमा कराए गए। इसके बावजूद 4596 वाहन चालक ऐसे हैं, जिन्हें चालान की कार्रवाई का डर नहीं है। हैरानी की बात यह है कि इनमें कई ऐसे हैं, जिनका कभी 20 बार तो कभी 36 बार यातायात नियम का उल्लंघन करने पर चालान कट चुका है। जनपद में लाइसेंस बनवाने वाले नव युवकों में 40 फीसदी सही से तीन मिनट भी गाड़ी नहीं चला पाते हैं, जो मड़ियाहूं रोड पर ऊंचनी कला में ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बाद टेस्ट में फेल हो जाते हैं। यह ड्राइविंग ट्रैक पर 74 कैमरे की निगरानी में चार स्टेप में टेस्ट होती है। प्रशिक्षण केंद्र संस्थापक कृष्णमूर्ति सिंह के मुताबिक रोजाना 180 का स्लॉट मिलता है, जिसमें करीब 140-150 लोग आते हैं लेकिन इनमें 40 फीसदी फेल हो जाते हैं। यानी वह ठीक से गाड़ी नहीं चला पाते हैं।
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