{"_id":"6963d6b825535b2ee6012b6c","slug":"hari-dutt-joshi-a-hero-of-three-wars-is-no-more-he-had-defeated-the-enemies-almora-news-c-232-1-shld1002-138611-2026-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: तीन युद्धों के वीर हरि दत्त जोशी अब नहीं रहे, दुश्मनों के छुड़ाए थे छक्के","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: तीन युद्धों के वीर हरि दत्त जोशी अब नहीं रहे, दुश्मनों के छुड़ाए थे छक्के
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 11 Jan 2026 10:51 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। भारत मां की रक्षा के लिए तीन युद्ध लड़ने वाले योद्वा सेवानिवृत लांस नायक हरि दत्त जोशी का निधन हो गया है। वह 90 साल के थे। तीनों युद्धों में उन्होंने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाएं थे। उनके निधन पर पूर्व सैनिकों और विभिन्न संगठनों ने शोक जताया है।
तीन युद्धों के वीर हरि दत्त जोशी का जन्म बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के सुलमती गांव में हुआ था। वर्तमान में वह नगर के पांडेखोला में रहते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सेना में भर्ती हो गए। भारतीय सेना में सेवा के दौरान उन्होंने 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्स साहस दिखाया। तीनों युद्धों में उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए कई दुश्मनों को ढेर किया। परिजनों के मुताबिक वह काफी फुर्तीले थे। युद्ध के दौरान उनकी फुर्ती के चलते कई बार वह दुश्मन से बच निकले। 1973 में सिक्स कुमाऊं बटालियन से लांस नायक पद से सेवानिवृत होने के बाद वह अपने गांव सुलमती में बस गए। उनके बड़े पुत्र बसंत जोशी जीआईसी खातिरकेती में अर्थशास्त्र विषय में अतिथि प्रवक्ता है। उन्होंने यहां पांडेखोला में मकान बनाया है। हरी दत्त भी उनके परिवार के साथ ही रहते थे। शनिवार को उन्होंने घर पर ही अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे पत्नी नंदी जोशी समेत नाती पोतो समेत भरा पूरा परिवार रोता बिलखता छोड़ गए हैं।
दादा से पोते-पोतियों ने सुनी जंग की कहानी
योद्धा हरी दत्त जोशी नाती पोतो को युद्ध की कहानी सुनाते थे। कमल जोशी, खुशी जोशी, रियांश, चंदू दादा से जंग की कहानी सुनकर रोमांचित हो जाते थे। उनके वीरता के चर्चे गांव में होते थे। हरि दत्त जोशी युवाओं को हमेशा सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उनके छोटे पुत्र हरीश जोशी जीआईसी सैंज में भूगोल के अतिथि प्रवक्ता है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृति के बाद भी पिता को सेना से प्यार था।
Trending Videos
तीन युद्धों के वीर हरि दत्त जोशी का जन्म बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के सुलमती गांव में हुआ था। वर्तमान में वह नगर के पांडेखोला में रहते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सेना में भर्ती हो गए। भारतीय सेना में सेवा के दौरान उन्होंने 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्स साहस दिखाया। तीनों युद्धों में उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए कई दुश्मनों को ढेर किया। परिजनों के मुताबिक वह काफी फुर्तीले थे। युद्ध के दौरान उनकी फुर्ती के चलते कई बार वह दुश्मन से बच निकले। 1973 में सिक्स कुमाऊं बटालियन से लांस नायक पद से सेवानिवृत होने के बाद वह अपने गांव सुलमती में बस गए। उनके बड़े पुत्र बसंत जोशी जीआईसी खातिरकेती में अर्थशास्त्र विषय में अतिथि प्रवक्ता है। उन्होंने यहां पांडेखोला में मकान बनाया है। हरी दत्त भी उनके परिवार के साथ ही रहते थे। शनिवार को उन्होंने घर पर ही अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे पत्नी नंदी जोशी समेत नाती पोतो समेत भरा पूरा परिवार रोता बिलखता छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दादा से पोते-पोतियों ने सुनी जंग की कहानी
योद्धा हरी दत्त जोशी नाती पोतो को युद्ध की कहानी सुनाते थे। कमल जोशी, खुशी जोशी, रियांश, चंदू दादा से जंग की कहानी सुनकर रोमांचित हो जाते थे। उनके वीरता के चर्चे गांव में होते थे। हरि दत्त जोशी युवाओं को हमेशा सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उनके छोटे पुत्र हरीश जोशी जीआईसी सैंज में भूगोल के अतिथि प्रवक्ता है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृति के बाद भी पिता को सेना से प्यार था।