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Bageshwar News: एनर्जी डि्रंक के विज्ञापन से मिली प्रेरणा, हिमांशु बन गए देश के एकमात्र स्पीड विंग पायलट
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कपकोट (बागेश्वर)। राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग एक्यूरेसी प्रतियोगिता के प्रतिभागियों में देहरादून के स्पीड विंग पायलट हिमांशु गुप्ता भी शामिल हैं। एनर्जी डि्रंक के विज्ञापन से प्रेरित होकर स्पीड विंग का हिस्सा बनने वाले हिमांशु इस स्पर्धा में देश के एकमात्र पायलट हैं। वह 115 किमी प्रति घंटे की स्पीड से उड़ान भरकर मात्र ढाई मिनट में जालेख से केदारेश्वर के बीच की दूरी तय कर रहे हैं, जबकि एक्यूरेसी के पायलट इसी उड़ान के लिए 15 से 20 मिनट का समय ले रहे हैं।
हिमांशु ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के बाद 2020 में उन्हें पैराग्लाइडिंग करने का शौक चढ़ा। प्रदेश में निशुल्क प्रशिक्षण की सुविधा नहीं थी तो उन्होंने हिमाचल जाकर पैराग्लाइडिंग सीखी। साल 2025 में एक विज्ञापन ने उन्हें इस साहसिक खेल की सबसे तेज स्पर्धा सीखने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने स्पीड प्लाइंग शुरू कर दी। इससे पहले देश में कोई भी पायलट स्पीड विंग नहीं सीखा था। उन्होंने बताया कि विदेशों में स्पीड विंग 2007 में शुरू हुई थी, भारत में उन्होंने ही इसकी शुरूआत की। अब तक वह 1000 घंटे से अधिक की उड़ान कर चुके हैं।
स्पीड विंग के लिए मुफीद है जालेख, यहां देना चाहते हैं ट्रेनिंग
हिमांशु ने बताया कि कपकोट का जालेख से केदारेश्वर की लोकेशन प्रदेश में सबसे बेहतरीन है। यहां की टेक ऑफ और लैंडिंग साइट दोनों की बेहतरीन हैं। टेक ऑफ के लिए हाइट बहुत अच्छी और सुरक्षित है। अच्छी हाइट होने के साथ टेक ऑफ साइट से लैंडिंग साइट साफ दिखाई देती है, जो स्पीड उड़ान के लिए सबसे बेहतर है। भीमताल और टिहरी में उनको साइट छोटी होने से टेक ऑफ से लैंडिंग तक मात्र 15-20 सेकंड लगते हैं, जबकि यहां पर ढाई मिनट तक का समय मिल रहा है। कहा कि वह भविष्य में यहां ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलकर युवाओं को स्पीड उड़ान का प्रशिक्षण देना चाहते हैं।
रोजगार के बेहतरीन मौके देती है पैराग्लाइडिंग
हिमांशु बताते हैं कि पैराग्लाइडिंग खेल के साथ-साथ रोजगार का भी बेहतर माध्यम है। प्रशिक्षण के बाद ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, टेंडम उड़ान भरकर, पैराग्लाइडिंग स्कूल खोलकर रोजगार किया जा सकता है। सरकारी नौकरी में भी लाभ मिलता है।
कोट
हिमांशु भारत का एकमात्र स्पीड विंग पायलट है। इसने पैराग्लाइडिंग सीखने के बाद खुद ही स्पीड फ्लाइंग की शुरुआत की। बेहतर ट्रेनिंग के लिए इस साल वह तुर्की भी जा रहा है। लगातार सीखने का जुनून और बेहतर स्किल के चलते वह उच्च स्तर का पायलट है।
बलवंत सिंह कपकोटी, जिला साहसिक खेल अधिकारी, नैनीताल
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हिमांशु ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के बाद 2020 में उन्हें पैराग्लाइडिंग करने का शौक चढ़ा। प्रदेश में निशुल्क प्रशिक्षण की सुविधा नहीं थी तो उन्होंने हिमाचल जाकर पैराग्लाइडिंग सीखी। साल 2025 में एक विज्ञापन ने उन्हें इस साहसिक खेल की सबसे तेज स्पर्धा सीखने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने स्पीड प्लाइंग शुरू कर दी। इससे पहले देश में कोई भी पायलट स्पीड विंग नहीं सीखा था। उन्होंने बताया कि विदेशों में स्पीड विंग 2007 में शुरू हुई थी, भारत में उन्होंने ही इसकी शुरूआत की। अब तक वह 1000 घंटे से अधिक की उड़ान कर चुके हैं।
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स्पीड विंग के लिए मुफीद है जालेख, यहां देना चाहते हैं ट्रेनिंग
हिमांशु ने बताया कि कपकोट का जालेख से केदारेश्वर की लोकेशन प्रदेश में सबसे बेहतरीन है। यहां की टेक ऑफ और लैंडिंग साइट दोनों की बेहतरीन हैं। टेक ऑफ के लिए हाइट बहुत अच्छी और सुरक्षित है। अच्छी हाइट होने के साथ टेक ऑफ साइट से लैंडिंग साइट साफ दिखाई देती है, जो स्पीड उड़ान के लिए सबसे बेहतर है। भीमताल और टिहरी में उनको साइट छोटी होने से टेक ऑफ से लैंडिंग तक मात्र 15-20 सेकंड लगते हैं, जबकि यहां पर ढाई मिनट तक का समय मिल रहा है। कहा कि वह भविष्य में यहां ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलकर युवाओं को स्पीड उड़ान का प्रशिक्षण देना चाहते हैं।
रोजगार के बेहतरीन मौके देती है पैराग्लाइडिंग
हिमांशु बताते हैं कि पैराग्लाइडिंग खेल के साथ-साथ रोजगार का भी बेहतर माध्यम है। प्रशिक्षण के बाद ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, टेंडम उड़ान भरकर, पैराग्लाइडिंग स्कूल खोलकर रोजगार किया जा सकता है। सरकारी नौकरी में भी लाभ मिलता है।
कोट
हिमांशु भारत का एकमात्र स्पीड विंग पायलट है। इसने पैराग्लाइडिंग सीखने के बाद खुद ही स्पीड फ्लाइंग की शुरुआत की। बेहतर ट्रेनिंग के लिए इस साल वह तुर्की भी जा रहा है। लगातार सीखने का जुनून और बेहतर स्किल के चलते वह उच्च स्तर का पायलट है।
बलवंत सिंह कपकोटी, जिला साहसिक खेल अधिकारी, नैनीताल