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Almora News: किशोर और युवा हो रहे हैं मानसिक तनाव के शिकार, रोजाना 45 लोग पहुंचते हैं अस्पताल
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अल्मोड़ा। किशोर और युवा तेजी से मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। 40 से 45 लोग रोजाना स्थानीय अस्पताल में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पास उपचार को पहुंच रहे हैं। इनमें करीब आठ से दस किशोर होते हैं। इसका प्रमुख कारण अकेलापन, बढ़ता स्क्रीन टाइम, शहरी तनाव, प्रतिस्पर्धा और परामर्श सेवाओं की कमी है।
दरअसल किशोर अवस्था में युवा शैक्षणिक दबाव, सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग पारिवारिक अपेक्षाओं और शारीरिक परिवर्तनों के कारण तेजी से मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। इस तनाव से उनमें डिप्रेशन, चिंता थकान और आत्महत्या के विचार आम हो रहे हैं। युवा वर्ग सबसे अधिक मानसिक तनाव की चपेट में आ रहा हैं। खासकर 17 से 25 साल के युवा मानसिक तनाव से अधिक जूझ रहे हैं। कई बार अभिभावक बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं। इससे भी युवाओं तनाव में रहते हैं।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में तैनात क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पास 40 से 45 मरीज रोजाना मानसिक मानसिक तनाव का उपचार कराने पहुंच रहे हैं। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक तनाव के चलते युवाओं का झुकाव नशे की ओर हो जाता है। नशे की लत लगने पर वह धीरे-धीरे इसके आदि हो जाते हैं। युवाओं की मानसिक अस्वस्थता देश के भविष्य की शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए चुनौती बनती जा रही है।
किशोर व युवाओं को चाहिए सोशल, सेल्फ और इमोशनल सपोर्ट : प्रियंका
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में तैनात क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रियंका बोनाल ने बताया कि किशोर और 16 से 25 साल के युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। वह खुद को इमोशनली कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। उन्हें भावानात्मक सपोर्ट की जरूरत होती है।
अभिभावकों को उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। कई बार अभिभावक भी उनकी बातों को अनसुना कर देते हैं। ऐसे में वह खुद को अकेला महसूस करते हैं। किशोर और युवाओं को सोशल, सेल्फ और इमोशनल सपोर्ट चाहिए। अभिभावकों को उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहिए।
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दरअसल किशोर अवस्था में युवा शैक्षणिक दबाव, सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग पारिवारिक अपेक्षाओं और शारीरिक परिवर्तनों के कारण तेजी से मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। इस तनाव से उनमें डिप्रेशन, चिंता थकान और आत्महत्या के विचार आम हो रहे हैं। युवा वर्ग सबसे अधिक मानसिक तनाव की चपेट में आ रहा हैं। खासकर 17 से 25 साल के युवा मानसिक तनाव से अधिक जूझ रहे हैं। कई बार अभिभावक बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं। इससे भी युवाओं तनाव में रहते हैं।
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मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में तैनात क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पास 40 से 45 मरीज रोजाना मानसिक मानसिक तनाव का उपचार कराने पहुंच रहे हैं। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक तनाव के चलते युवाओं का झुकाव नशे की ओर हो जाता है। नशे की लत लगने पर वह धीरे-धीरे इसके आदि हो जाते हैं। युवाओं की मानसिक अस्वस्थता देश के भविष्य की शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए चुनौती बनती जा रही है।
किशोर व युवाओं को चाहिए सोशल, सेल्फ और इमोशनल सपोर्ट : प्रियंका
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में तैनात क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रियंका बोनाल ने बताया कि किशोर और 16 से 25 साल के युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। वह खुद को इमोशनली कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। उन्हें भावानात्मक सपोर्ट की जरूरत होती है।
अभिभावकों को उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। कई बार अभिभावक भी उनकी बातों को अनसुना कर देते हैं। ऐसे में वह खुद को अकेला महसूस करते हैं। किशोर और युवाओं को सोशल, सेल्फ और इमोशनल सपोर्ट चाहिए। अभिभावकों को उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहिए।

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