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Bageshwar News: भूस्खलन और नदी कटाव से खेंचवा तोक पर मंडराया संकट, ग्रामीण भयभीत
Wed, 29 Jul 2026 12:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 29 Jul 2026 12:24 AM IST
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बागेश्वर। कपकोट तहसील के कालापैर कापड़ी क्षेत्र में रामगंगा नदी के रौद्र रूप और लगातार हो रहे भूस्खलन से खेंचवा सहित आसपास के छह तोकों पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। ग्रामीण डर के साए में रातें गुजारने के लिए मजबूर हैं। कालापैर कापड़ी के ग्राम प्रधान नंदन सिंह दशौनी ने बताया कि बीते दो वर्ष पूर्व रामगंगा नदी में मलबे के कारण डैम बन गया था। डैम खोलने के दौरान हरड़िया नाले का बहाव और समस्त मलबा मुड़ने से नदी की मुख्य धारा अब सीधे खेंचवा तोक की ओर बह रही है। नदी के इस सीधे कटाव के कारण वहां रह रहे अनुसूचित जाति के नौ परिवारों के मकानों और उपजाऊ कृषि भूमि पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
भकुना, ठौका, कालापैर कापड़ी, वेदुआ बगड़ और क्षेत्र का एक प्राथमिक विद्यालय भी भू-कटाव की जद में आ रहा है जिससे कुल 50 से 60 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि वर्ष 2023 में ही क्षेत्र का एकमात्र झूला पुल बह गया था जिसके बाद से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। लगातार उपेक्षा से आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नदी तटबंध और सुरक्षा कार्य शुरू नहीं किए गए तो वे आगामी विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।
नदी का जलस्तर बढ़ने पर परिवारों के मकान ध्वस्त होने, भूमि कटाव बढ़ने और जान-माल की भारी हानि होने की आशंका बनी है। सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। -पूरन राम, ग्रामीण
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मानसून के समय भूस्खलन का खतरा प्रतिवर्ष बढ़ रहा है। भू-कटाव के कारण आधी से अधिक जमीन नष्ट हो गई है। नौ परिवारों के लिए अधिक खतरा बना हुआ है। डर के साए में रात गुजर रही है। -मनीष कुमार, ग्रामीण
जनहित और संभावित आपदा को देखते हुए जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराकर आवश्यक सुरक्षा कार्य, तटबंध निर्माण, नदी प्रशिक्षण और अन्य स्थायी सुरक्षात्मक उपाय जल्द कराने चाहिए। - मनोज कोशयारी, बीडीसी
भूस्खलन के कारण कई परिवारों पर खतरा बना हुआ है। प्रशासन को तत्काल इसका संज्ञान लेना चाहिए ताकि खेंचवा तोक के नौ परिवारों और उनकी संपत्ति को किसी भी संभावित दुर्घटना से सुरक्षित रखा जा सके। -नंदन सिंह दशौनी, प्रधान कालापैर कापड़ी
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भकुना, ठौका, कालापैर कापड़ी, वेदुआ बगड़ और क्षेत्र का एक प्राथमिक विद्यालय भी भू-कटाव की जद में आ रहा है जिससे कुल 50 से 60 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि वर्ष 2023 में ही क्षेत्र का एकमात्र झूला पुल बह गया था जिसके बाद से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। लगातार उपेक्षा से आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नदी तटबंध और सुरक्षा कार्य शुरू नहीं किए गए तो वे आगामी विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।
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नदी का जलस्तर बढ़ने पर परिवारों के मकान ध्वस्त होने, भूमि कटाव बढ़ने और जान-माल की भारी हानि होने की आशंका बनी है। सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। -पूरन राम, ग्रामीण
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मानसून के समय भूस्खलन का खतरा प्रतिवर्ष बढ़ रहा है। भू-कटाव के कारण आधी से अधिक जमीन नष्ट हो गई है। नौ परिवारों के लिए अधिक खतरा बना हुआ है। डर के साए में रात गुजर रही है। -मनीष कुमार, ग्रामीण
जनहित और संभावित आपदा को देखते हुए जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराकर आवश्यक सुरक्षा कार्य, तटबंध निर्माण, नदी प्रशिक्षण और अन्य स्थायी सुरक्षात्मक उपाय जल्द कराने चाहिए। - मनोज कोशयारी, बीडीसी
भूस्खलन के कारण कई परिवारों पर खतरा बना हुआ है। प्रशासन को तत्काल इसका संज्ञान लेना चाहिए ताकि खेंचवा तोक के नौ परिवारों और उनकी संपत्ति को किसी भी संभावित दुर्घटना से सुरक्षित रखा जा सके। -नंदन सिंह दशौनी, प्रधान कालापैर कापड़ी