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जोशीमठ हेलिकॉप्टर हादसा: 12 किमी के दुर्गम पहाड़ी रास्ते से शवों को सड़क तक लाने में जुटे जवान, रेस्क्यू जारी

Sat, 31 Oct 2026 01:06 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Published by: Renu Saklani Updated Sat, 31 Oct 2026 01:06 PM IST
सार

जोशीमठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान की चुनौती बढ़ रही हैंं। अंधेरा और दुर्गम रास्ता बाधा बनने के कारण रात में शवों को सड़क तक नहीं पहुंचाया जा सका। शनिवार सुबह सेना समेत विभिन्न सुरक्षा बलों ने दोबारा मोर्चा संभाला और शवों को निकालने का अभियान शुरू किया।

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Badrinath helicopter crash joshimath rescue teams bring Six Bodies through difficult mountain terrain
हेलिकॉप्टर हादसा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

जोशीमठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए सभी छह लोगों के शव देर रात सेना ने अपने कब्जे में ले लिए थे। हालांकि, अंधेरा होने और घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता दुर्गम होने के कारण शवों को रात में सड़क तक नहीं लाया जा सका। इसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा।

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शनिवार सुबह एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और भारतीय सेना के जवान दोबारा घटनास्थल पर पहुंचे। यहां से सड़क की दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर पैदल है। जवान दुर्गम पहाड़ी रास्ते से शवों को सड़क तक लाने में जुटे हैं। प्रशासन के अनुसार, शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हालत में हैं, जिससे रेस्क्यू अभियान में अधिक समय लग रहा है। सुरक्षा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए टीमें पूरी सतर्कता के साथ अभियान चला रही हैं।

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डीजीसीए और एएआईबी की टीम करेगी दुर्घटना की जांच, आज पहुंचेंगे विशेषज्ञ
चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर दुर्घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और डीजीसीए की टीम करेगी। शनिवार को विशेषज्ञों की टीम उत्तराखंड पहुंचेगी। जांच के बाद ही हादसे के कारणों का सही पता लग पाएगा। इस साल चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में पहला हेलिकॉप्टर हादसा है।

वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान पांच हेलिकॉप्टर हादसे हुए थे। इसमें तीन हादसों में आपात लैंडिंग में हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त हुए थे लेकिन जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। उत्तरकाशी व केदार घाटी में दो हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में पायलट सहित 13 यात्रियों की मौत हुई थी। हेलिकॉप्टर दुर्घटना को रोकने के लिए प्रदेश सरकार के साथ डीजीसीए सख्त कदम उठाए थे।

ये भी पढे़ं...ज्योतिर्मठ हादसा: हवाई सेवाओं को लेकर चिंता, ट्रांस भारत के हेलीकॉप्टर की पहले भी हो चुकी है इमरजेंसी लैंडिंग

डीजीसीए के दिशानिर्देश पर हेलिकॉप्टर संचालन के लिए एसओपी बनाने के साथ निगरानी बढ़ाई है। सोनप्रयाग व सहस्त्रधारा में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीएस) व सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए। इसके अलावा मौसम खराब होने पर हेलिकॉप्टरों की हवाई उड़ान की अंतिम नहीं दी जाती है।

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