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Chamoli News: माणा गांव में आलू की खोदाई में जुटे काश्तकार
Fri, 25 Sep 2026 04:10 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Fri, 25 Sep 2026 04:10 PM IST
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फोटो-
गोपेश्वर। देश के प्रथम गांव माणा व आसपास के गांवों के ग्रामीण इन दिनों अपने खेतों में आलू की खोदाई करने में जुटे हुए हैं। बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से पहले ग्रामीण खेतों से आलू निकालकर बिक्री के लिए रख देते हैं। काश्तकारों ने अन्य नकदी फसलों को भी समेटना शुरू कर दिया है।
माणा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि अत्यधिक ठंडे मौसम और शुद्ध वातावरण में उगने वाले बदरीनाथ के आलू की गुणवत्ता और स्वाद बेहतरीन होता है। यहां रासायनिक खादों का उपयोग न के बराबर किया जाता है जिससे आलू में जैविक स्वाद मिलता है। अत्यधिक बर्फबारी के कारण यहां खेती का समय सीमित रहता है। काश्तकार साल में केवल एक बार आलू की फसल की बुआई करते हैं। गर्मियों की शुरुआत में आलू की बुवाई की जाती है जबकि शरद ऋतु की शुरुआत में इसकी खोदाई होती है। काश्तकारों के लिए आलू की फसल आजीविका का प्रमुख साधन है। संवाद
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गोपेश्वर। देश के प्रथम गांव माणा व आसपास के गांवों के ग्रामीण इन दिनों अपने खेतों में आलू की खोदाई करने में जुटे हुए हैं। बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से पहले ग्रामीण खेतों से आलू निकालकर बिक्री के लिए रख देते हैं। काश्तकारों ने अन्य नकदी फसलों को भी समेटना शुरू कर दिया है।
माणा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि अत्यधिक ठंडे मौसम और शुद्ध वातावरण में उगने वाले बदरीनाथ के आलू की गुणवत्ता और स्वाद बेहतरीन होता है। यहां रासायनिक खादों का उपयोग न के बराबर किया जाता है जिससे आलू में जैविक स्वाद मिलता है। अत्यधिक बर्फबारी के कारण यहां खेती का समय सीमित रहता है। काश्तकार साल में केवल एक बार आलू की फसल की बुआई करते हैं। गर्मियों की शुरुआत में आलू की बुवाई की जाती है जबकि शरद ऋतु की शुरुआत में इसकी खोदाई होती है। काश्तकारों के लिए आलू की फसल आजीविका का प्रमुख साधन है। संवाद
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