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Chamoli News: विज्ञान संकाय के विषयों की पढ़ाई की राह में किसान की भूमि आई
Sat, 25 Jul 2026 04:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 25 Jul 2026 04:41 PM IST
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विज्ञान संकाय के विषयों की पढ़ाई की राह में किसान की भूमि आई
स्वीति के बाद भी नारायणबगड़ महाविद्यालय में विज्ञान संकाय नहीं हो पाया शुरू
-छह साल से हो रहा महाविद्यालय का संचालन, 250 से अधिक छात्र-छात्राएं कर रहे हैं अध्ययन
नारायणबगड़। मींग कस्बे के मगनलाल शाह राजकीय महाविद्यालय में स्थापना के छह साल बाद भी विज्ञान संकाय की कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। इससे क्षेत्र के छात्रों को विज्ञान स्नातक की पढ़ाई के लिए बाहरी महाविद्यालयों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हालांकि यहां विज्ञान संकाय की स्थापना के लिए स्वीकृति मिली हुई है लेकिन भवन निर्माण के लिए भूमि चयन में एक किसान की भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पाया है।
महाविद्यालय में वर्तमान में 250 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। कला संकाय में भी भूगोल, संस्कृत और गृहविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय नहीं पढ़ाए जा रहे हैं। विज्ञान विषय के अभाव में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को परेशानी हो रही है। इंटरमीडिएट विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण होने के बाद भी उन्हें कला संकाय में प्रवेश लेना पड़ रहा है। राजवर्धन बुटोला, अमीषा, मीनाक्षी, मयंक और दयमंती जैसे कई छात्र इस समस्या से जूझ रहे हैं। कला संकाय में भी भूगोल, संस्कृत और गृहविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय नहीं पढ़ाए जा रहे हैं। इससे छात्रों को मजबूरी में अन्य विषय चुनने पड़ रहे हैं। वहीं प्राचार्य डॉ. बीरेंद्र सिंह ने बताया कि विज्ञान संकाय खोलने का प्रस्ताव शासन स्तर से मिल गया है। हालांकि, भवन के अभाव में यह मामला अटका हुआ है। महाविद्यालय परिसर में भूमि की कमी एक मुख्य कारण है। मींग गांव के एक कृषक की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने पर ही भवन निर्माण संभव हो पाएगा।
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स्वीति के बाद भी नारायणबगड़ महाविद्यालय में विज्ञान संकाय नहीं हो पाया शुरू
-छह साल से हो रहा महाविद्यालय का संचालन, 250 से अधिक छात्र-छात्राएं कर रहे हैं अध्ययन
नारायणबगड़। मींग कस्बे के मगनलाल शाह राजकीय महाविद्यालय में स्थापना के छह साल बाद भी विज्ञान संकाय की कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। इससे क्षेत्र के छात्रों को विज्ञान स्नातक की पढ़ाई के लिए बाहरी महाविद्यालयों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हालांकि यहां विज्ञान संकाय की स्थापना के लिए स्वीकृति मिली हुई है लेकिन भवन निर्माण के लिए भूमि चयन में एक किसान की भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पाया है।
महाविद्यालय में वर्तमान में 250 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। कला संकाय में भी भूगोल, संस्कृत और गृहविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय नहीं पढ़ाए जा रहे हैं। विज्ञान विषय के अभाव में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को परेशानी हो रही है। इंटरमीडिएट विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण होने के बाद भी उन्हें कला संकाय में प्रवेश लेना पड़ रहा है। राजवर्धन बुटोला, अमीषा, मीनाक्षी, मयंक और दयमंती जैसे कई छात्र इस समस्या से जूझ रहे हैं। कला संकाय में भी भूगोल, संस्कृत और गृहविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय नहीं पढ़ाए जा रहे हैं। इससे छात्रों को मजबूरी में अन्य विषय चुनने पड़ रहे हैं। वहीं प्राचार्य डॉ. बीरेंद्र सिंह ने बताया कि विज्ञान संकाय खोलने का प्रस्ताव शासन स्तर से मिल गया है। हालांकि, भवन के अभाव में यह मामला अटका हुआ है। महाविद्यालय परिसर में भूमि की कमी एक मुख्य कारण है। मींग गांव के एक कृषक की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने पर ही भवन निर्माण संभव हो पाएगा।
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