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Champawat News: रीप परियोजना ने दिए पंख, महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
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चंपावत। जिले के लोहाघाट क्षेत्र में संचालित समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। जय गंगनाथ स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सिलाई उद्यम के जरिए हर माह 15 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता में राज्य सरकार की योजनाओं और ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
समूह की महिलाएं पहले केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली। समूह के माध्यम से उन्हें रीप परियोजना के तहत आर्थिक सहायता और बैंक ऋण उपलब्ध हुआ, इससे उन्होंने गांव में सिलाई मशीन आधारित उद्यम शुरू किया।
उद्यम की स्थापना के लिए कुल तीन लाख रुपये की लागत आई। समूह की सदस्य पूजा रानी ने स्वयं 75 हजार रुपये का अंशदान दिया। रीप परियोजना के तहत उन्हें डेढ़ लाख रुपये का बैंक ऋण मिला, जबकि शेष 75 हजार रुपये परियोजना सहायता के रूप में प्रदान किए गए।
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सिलाई कार्य में मेहनत और ग्राहकों के प्रति बेहतर व्यवहार के चलते उनका काम तेजी से आगे बढ़ा। वर्तमान में समूह की महिलाएं सिलाई के साथ-साथ पार्ट टाइम मेकअप का कार्य भी कर रही हैं, इससे उनकी आय में और वृद्धि हुई है।
समूह की महिलाएं पहले केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली। समूह के माध्यम से उन्हें रीप परियोजना के तहत आर्थिक सहायता और बैंक ऋण उपलब्ध हुआ, इससे उन्होंने गांव में सिलाई मशीन आधारित उद्यम शुरू किया।
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उद्यम की स्थापना के लिए कुल तीन लाख रुपये की लागत आई। समूह की सदस्य पूजा रानी ने स्वयं 75 हजार रुपये का अंशदान दिया। रीप परियोजना के तहत उन्हें डेढ़ लाख रुपये का बैंक ऋण मिला, जबकि शेष 75 हजार रुपये परियोजना सहायता के रूप में प्रदान किए गए।
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