हरिद्वार: सर्वे में घटा धान का उत्पादन तो अब पहले की तरह नहीं बेच पाएंगे किसान, सरकारी खरीद पर पड़ेगा असर
हरिद्वार जिले में धान की क्रॉप कटिंग के सर्वे में औसत उत्पादन घटने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब सरकारी खरीद केंद्रों पर किसान अपने खेत के निर्धारित उत्पादन के हिसाब से ही धान बेच सकेंगे, जिससे पहले की तरह धान बेच पाना मुश्किल हो सकता है।
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सर्वे में धान का उत्पादन घटने से किसान पहले की तरह अपना धान नहीं बेच पाएंगे। दरअसल, जनपद में 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन घट गया है। ऐसे में किसानों का धान सरकारी केंद्रों पर उत्पादन के हिसाब से खरीदा जाएगा। इससे किसान अपना धान बेचने के लिए चिंतित नजर आ रहे हैं।
सरकार की ओर से गेहूं और धान का औसतन उत्पादन जानने के लिए क्रॉप कटिंग कराई जाती है। इसमें जनपद के अधिकारियों की ओर से खेतों में जाकर क्रॉप कटिंग की जाती है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाती है। शासन की ओर से प्रदेश का औसत उत्पादन निकाला जाता है। इसके आधार पर ही किसानों से धान और गेहूं खरीदा जाता है।
पिछले साल हुई धान की क्राॅप कटिंग के औसत उत्पादन को जिला स्तर पर लिया गया है लेकिन इससे जनपद का औसतन उत्पादन बहुत अधिक गिर गया है जो प्रदेश स्तर पर पहले 60 हेक्टेयर (15 बीघा) प्रति क्विंटल था। वह अब कम होकर 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह गया है।
अब इसी उत्पादित मानक से किसानों का धान खरीदा जाएगा। इस वजह से सर्वे से अधिक उत्पादन करने वाले किसान अपना धान सरकारी केंद्रों पर नहीं बेच पाएंगे जबकि पहले 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन होने से किसानों कोई परेशानी नहीं आती थी इसलिए इसका किसान संगठनों की ओर से भी विरोध किया जा रहा है। उनकी ओर से पूर्व के सर्वे की तरह किसानों का धान खरीदने की छूट देने की मांग की जा रही है।
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धान के बढ़ाए 12 खरीद केंद्र
जनपद में इस बार धान की खरीदारी के लिए 56 सरकारी केंद्र बनाए हैं जो पिछले साल से 12 अधिक बढ़ाए गए हैं क्योंकि पिछले साल 44 केंद्र बनाए गए थे। सामान्य धान का सरकारी मूल्य 2441 और ग्रेड-ए के धान की कीमत 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। अब तक जनपद में एक अक्तूबर तक चल रही खरीद में मात्र 600 क्विंटल धान की खरीद हुई है।
शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किसानों से धान खरीदा जाएगा लेकिन किसानों का समस्त धान खरीदा जाएगा। इसमें किसानों को चिंता की जरूरत नहीं है। धान की खरीदारी भी कटाई में तेजी होने से बढ़ जाएगी। -प्रमोद सती, उप संभागीय विपणन अधिकारी, हरिद्वार