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Haridwar News: बच्चे के अपहरण-दुर्व्यापार में दो महिलाओं को 10-10 साल की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Mon, 13 Apr 2026 08:22 PM IST
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- ज्वालापुर का था मामला, चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
- साक्ष्यों के अभाव में अन्य पांच आरोपियों को किया गया बरी
रोशनाबाद। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.के. श्रीवास्तव की अदालत ने आठ माह के मासूम के अपहरण और मानव तस्करी (दुर्व्यापार) के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दो महिला आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आशा और रूबी को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 8-8 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं साक्ष्यों के अभाव में पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सैनी ने बताया कि 10 दिसंबर 2022 को ज्वालापुर कोतवाली के कड़च्छ क्षेत्र निवासी रविंद्र पुत्र चमन लाल का करीब आठ माह का बेटा संदिग्ध परिस्थितियों में घर से गायब हो गया था। रविंद्र की पत्नी के अनुसार, वह कपड़े सुखाने छत पर गई थी और लौटने पर खाट पर सो रहा बच्चा नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान 11 दिसंबर 2022 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सप्तऋषि स्थित भारत माता मंदिर के पास से आशा और रूबी को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से अपहृत बच्चा सकुशल बरामद हुआ, जिसकी पहचान परिजनों ने मौके पर ही कर ली।
जांच में सामने आया कि आशा और रूबी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची थी। बच्चे को चोरी कर संजय शर्मा और पायल को सौंपा गया था जिन्हें बच्चे की जरूरत बताई गई थी। मामले में पुलिस ने आशा निवासी सलेमपुर रानीपुर, रूबी निवासी ग्राम सीतापुर ज्वालापुर, पायल व उसके पति संजय शर्मा निवासी श्यामपुर, सुषमा निवासी ज्वालपुर, किरण और अनीता निवासी ज्वालापुर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आशा और रूबी को मानव तस्करी के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना, अपहरण के तहत 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और 3-3 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
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इन्हें अदालत ने किया बरी
वहीं न्यायालय ने संजय शर्मा, पायल, सुषमा, किरण और अनीता को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि महज 8 माह के मासूम का दुर्व्यापार के उद्देश्य से अपहरण करना अत्यंत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में न्याय के उद्देश्य की पूर्ति के लिए कठोर दंड आवश्यक है।
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रोशनाबाद। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.के. श्रीवास्तव की अदालत ने आठ माह के मासूम के अपहरण और मानव तस्करी (दुर्व्यापार) के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दो महिला आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आशा और रूबी को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 8-8 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं साक्ष्यों के अभाव में पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सैनी ने बताया कि 10 दिसंबर 2022 को ज्वालापुर कोतवाली के कड़च्छ क्षेत्र निवासी रविंद्र पुत्र चमन लाल का करीब आठ माह का बेटा संदिग्ध परिस्थितियों में घर से गायब हो गया था। रविंद्र की पत्नी के अनुसार, वह कपड़े सुखाने छत पर गई थी और लौटने पर खाट पर सो रहा बच्चा नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान 11 दिसंबर 2022 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सप्तऋषि स्थित भारत माता मंदिर के पास से आशा और रूबी को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से अपहृत बच्चा सकुशल बरामद हुआ, जिसकी पहचान परिजनों ने मौके पर ही कर ली।
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जांच में सामने आया कि आशा और रूबी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची थी। बच्चे को चोरी कर संजय शर्मा और पायल को सौंपा गया था जिन्हें बच्चे की जरूरत बताई गई थी। मामले में पुलिस ने आशा निवासी सलेमपुर रानीपुर, रूबी निवासी ग्राम सीतापुर ज्वालापुर, पायल व उसके पति संजय शर्मा निवासी श्यामपुर, सुषमा निवासी ज्वालपुर, किरण और अनीता निवासी ज्वालापुर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आशा और रूबी को मानव तस्करी के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना, अपहरण के तहत 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और 3-3 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
इन्हें अदालत ने किया बरी
वहीं न्यायालय ने संजय शर्मा, पायल, सुषमा, किरण और अनीता को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि महज 8 माह के मासूम का दुर्व्यापार के उद्देश्य से अपहरण करना अत्यंत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में न्याय के उद्देश्य की पूर्ति के लिए कठोर दंड आवश्यक है।
