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नारियां ही करती हैं संस्कारवान पीढ़ियों का निर्माण: जैसल
Mon, 13 Jul 2026 06:28 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Mon, 13 Jul 2026 06:28 PM IST
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- गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में चल रहा प्रशिक्षण संपन्न
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में चल रहे आर्य वीर और आर्या वीरांगना दल प्रशिक्षण शिविर का समापन हो गया। इस दौरान हवन-यज्ञ कर प्रशिक्षणार्थियों को विदा किया गया। बतौर मुख्य अतिथि मेयर किरण जैसल ने कहा कि नारियां ही संस्कारवान एवं सुसंस्कृत पीढ़ियों का निर्माण करतीं हैं, इसलिए, महिला शिक्षा को बढ़ाने और नेतृत्व प्रदान कर अधिक दक्ष व सक्षम बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। कहा आर्य-पद्धति नैतिक व चरित्र निर्माण करने की आधारशिला है।
वेदों में बताए गए रास्तों पर चलकर जीवन यापन करने से चरित्र की उन्नति संभव है। कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि आर्य विचार धारा से जुडा व्यक्तित्व ही आदर्श समाज व राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। युवाओं को वेदों की ओर लौटना चाहिए। चरथावल गुरुकुल के डा. योगेश भारद्वाज ने कहा कि वैदिक विद्वानों के संरक्षण में शिक्षा के स्वरूप की उपयोगिता सर्वत्र महसूस की जा रही है। संस्कारों में तेजी से हो रहे परिवर्तन भारतीय संस्कृति के लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं। जिसके प्रति सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।इस मौके पर डा. दीनदयाल, डा. संदीप वेदालंकार, डा. अंकित कुमार, डा. मयंक पोखरियाल, डा. मनोज कुमार, डा. भारत वेदालंकार, डा. शिवकुमार चौहान, नागेंद्र सिंह राणा, रंजीत शर्मा, अरविंद शर्मा, आशीष धमांदा, डा. दीपिका, डा. प्रणवीर सिंह, डा. अजेंद्र कुमार, चरणजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में चल रहे आर्य वीर और आर्या वीरांगना दल प्रशिक्षण शिविर का समापन हो गया। इस दौरान हवन-यज्ञ कर प्रशिक्षणार्थियों को विदा किया गया। बतौर मुख्य अतिथि मेयर किरण जैसल ने कहा कि नारियां ही संस्कारवान एवं सुसंस्कृत पीढ़ियों का निर्माण करतीं हैं, इसलिए, महिला शिक्षा को बढ़ाने और नेतृत्व प्रदान कर अधिक दक्ष व सक्षम बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। कहा आर्य-पद्धति नैतिक व चरित्र निर्माण करने की आधारशिला है।
वेदों में बताए गए रास्तों पर चलकर जीवन यापन करने से चरित्र की उन्नति संभव है। कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि आर्य विचार धारा से जुडा व्यक्तित्व ही आदर्श समाज व राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। युवाओं को वेदों की ओर लौटना चाहिए। चरथावल गुरुकुल के डा. योगेश भारद्वाज ने कहा कि वैदिक विद्वानों के संरक्षण में शिक्षा के स्वरूप की उपयोगिता सर्वत्र महसूस की जा रही है। संस्कारों में तेजी से हो रहे परिवर्तन भारतीय संस्कृति के लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं। जिसके प्रति सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।इस मौके पर डा. दीनदयाल, डा. संदीप वेदालंकार, डा. अंकित कुमार, डा. मयंक पोखरियाल, डा. मनोज कुमार, डा. भारत वेदालंकार, डा. शिवकुमार चौहान, नागेंद्र सिंह राणा, रंजीत शर्मा, अरविंद शर्मा, आशीष धमांदा, डा. दीपिका, डा. प्रणवीर सिंह, डा. अजेंद्र कुमार, चरणजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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