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Kotdwar News: कर्तिया सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त, धान रोपाई पर संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Fri, 19 Jun 2026 04:27 PM IST
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20 गांवों के काश्तकार प्रभावित, मरम्मत और सफाई नहीं होने से चिंता बढ़ी
कोटद्वार। रिखणीखाल ब्लॉक के अंतर्गत करीब 20 गांवों को मंदाल नदी से सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने वाली कर्तिया सिंचाई नहर का शुरुआती एक किलोमीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे काश्तकारों को समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलने से धान की रोपाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
ग्राम कर्तिया निवासी एवं पूर्व प्रधानाचार्य भारत सिंह नेगी, अनिल सिंह, आनंद सिंह असवाल, शिशुपाल रावत, लक्ष्मण सिंह रावत, बीरेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्र के गांवों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आजादी के बाद 1952 में मंदाल नदी पर मालबास से कर्तिया तक नौ किमी. नहर बनाई गई। नहर बनने के बाद कर्तिया, ढिंगाचौड़, ढिकोलिया, कुई, छरगड्डी, गजरजाल, झर्त, गंगाजाल, बीरोंबाड़ी, धामधार समेत आसपास के तोक गांवों को लगातार सिंचाई की सुविधा मिल रही थी।
नहर की हालत खस्ताहाल होने पर सिंचाई विभाग ने पिछले वर्ष करीब एक करोड़ से नहर की मरम्मत कराई थी लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। उनका आरोप है कि पुराने प्लास्टर झड़ने के बजाए उसके ऊपर नया प्लास्टर करने से नहर का करीब 75 प्रतिशत प्लास्टर झड़कर भीतर मलबे के रूप में जमा हो गया है जिससे पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है।
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किसानों ने बताया कि नौ किमी लंबी नहर की देखरेख के लिए विभाग की ओर से केवल एक बेलदार तैनात है। इसके अतिरिक्त 200 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर दो अन्य श्रमिक लगाए गए हैं लेकिन कम पारिश्रमिक के कारण सफाई कार्य प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। आरोप लगाया कि संबंधित कनिष्ठ अभियंता का मुख्यालय सिंचाई बंगला स्टोर रथुवाढाब में होने के बावजूद वह कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते, जिससे किसानों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कर्तिया सिंचाई नहर का निरीक्षण करा जल्द मरम्मत व सफाई का कार्य करा क्षेत्र के काश्तकारों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
- जीतेंद्र कुमार, जेई सिंचाई खंड दुगड्डा।
कोटद्वार। रिखणीखाल ब्लॉक के अंतर्गत करीब 20 गांवों को मंदाल नदी से सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने वाली कर्तिया सिंचाई नहर का शुरुआती एक किलोमीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे काश्तकारों को समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलने से धान की रोपाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
ग्राम कर्तिया निवासी एवं पूर्व प्रधानाचार्य भारत सिंह नेगी, अनिल सिंह, आनंद सिंह असवाल, शिशुपाल रावत, लक्ष्मण सिंह रावत, बीरेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्र के गांवों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आजादी के बाद 1952 में मंदाल नदी पर मालबास से कर्तिया तक नौ किमी. नहर बनाई गई। नहर बनने के बाद कर्तिया, ढिंगाचौड़, ढिकोलिया, कुई, छरगड्डी, गजरजाल, झर्त, गंगाजाल, बीरोंबाड़ी, धामधार समेत आसपास के तोक गांवों को लगातार सिंचाई की सुविधा मिल रही थी।
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नहर की हालत खस्ताहाल होने पर सिंचाई विभाग ने पिछले वर्ष करीब एक करोड़ से नहर की मरम्मत कराई थी लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। उनका आरोप है कि पुराने प्लास्टर झड़ने के बजाए उसके ऊपर नया प्लास्टर करने से नहर का करीब 75 प्रतिशत प्लास्टर झड़कर भीतर मलबे के रूप में जमा हो गया है जिससे पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है।
किसानों ने बताया कि नौ किमी लंबी नहर की देखरेख के लिए विभाग की ओर से केवल एक बेलदार तैनात है। इसके अतिरिक्त 200 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर दो अन्य श्रमिक लगाए गए हैं लेकिन कम पारिश्रमिक के कारण सफाई कार्य प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। आरोप लगाया कि संबंधित कनिष्ठ अभियंता का मुख्यालय सिंचाई बंगला स्टोर रथुवाढाब में होने के बावजूद वह कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते, जिससे किसानों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कर्तिया सिंचाई नहर का निरीक्षण करा जल्द मरम्मत व सफाई का कार्य करा क्षेत्र के काश्तकारों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
- जीतेंद्र कुमार, जेई सिंचाई खंड दुगड्डा।