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Kotdwar News: भक्त दर्शन कॉलेज की भूमि पर भू-माफिया की नजर
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sat, 30 May 2026 06:22 PM IST
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महाविद्यालय की दान भूमि पर अतिक्रमण का मामला गरमाया
उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर कार्रवाई का किया अनुरोध, शासन को भी कराया अवगत
जयहरीखाल। भक्त दर्शन पीजी कॉलेज की स्थापना के लिए ग्रामीणों की ओर से दान में दी गई भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। कॉलेज प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा गया है।
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार वर्ष 1992 में ग्राम सभा स्यालगांव मल्ला, पट्टी लंगूर पल्ला, तहसील लैंसडौन के 14 ग्रामीणों ने उच्च शिक्षा के विकास के उद्देश्य से लगभग 184 नाली भूमि महाविद्यालय स्थापना के लिए दान दी थी। भूमि पर भवन निर्माण के बाद वर्ष 2004 से कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा निदेशक को भेजे पत्र में उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा अभिलेखों में और मौखिक रूप से यह बताया गया था कि महाविद्यालय को गुमखाल-कोटद्वार मोटर मार्ग के ऊपर एवं गुमखाल-लैंसडौन मोटर मार्ग के नीचे स्थित भूमि आवंटित की गई थी।
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महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान पिछले लगभग 34 वर्षों से उक्त भूमि का उपयोग एवं संरक्षण करता आ रहा है। गत माह एक बाहरी व्यक्ति ने उक्त भूमि पर काम शुरू कराया है। इस बाबत जानकारी करने पर संबंधित व्यक्ति ने दावा किया कि यह भूमि उसे स्यालगांव के कुछ निवासियों ने बेची है। पत्र में कहा गया है कि इससे भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
कॉलेज प्रशासन ने उच्च शिक्षा निदेशक से पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित करने, दान भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है जिससे भविष्य में किसी प्रकार के अतिक्रमण अथवा विवाद की आशंका न हो। पीटीए सदस्य प्रकाश का कहना है कि यह भूमि क्षेत्र में उच्च शिक्षा की स्थापना और विकास से जुड़ी हुई है। ऐसे में दान भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण जनभावनाओं से जुड़ा विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्राचार्य प्रो. एलआर राजवंशी ने बताया कि भूमि विवाद के संबंध में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराते हुए कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। महाविद्यालय प्रशासन संस्थान की भूमि एवं परिसंपत्तियों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। शासन व विभागीय स्तर पर आवश्यक पत्राचार किया जा चुका है। मामले की जांच रिपोर्ट मिलने पर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर कार्रवाई का किया अनुरोध, शासन को भी कराया अवगत
जयहरीखाल। भक्त दर्शन पीजी कॉलेज की स्थापना के लिए ग्रामीणों की ओर से दान में दी गई भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। कॉलेज प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा गया है।
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार वर्ष 1992 में ग्राम सभा स्यालगांव मल्ला, पट्टी लंगूर पल्ला, तहसील लैंसडौन के 14 ग्रामीणों ने उच्च शिक्षा के विकास के उद्देश्य से लगभग 184 नाली भूमि महाविद्यालय स्थापना के लिए दान दी थी। भूमि पर भवन निर्माण के बाद वर्ष 2004 से कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
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उच्च शिक्षा निदेशक को भेजे पत्र में उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा अभिलेखों में और मौखिक रूप से यह बताया गया था कि महाविद्यालय को गुमखाल-कोटद्वार मोटर मार्ग के ऊपर एवं गुमखाल-लैंसडौन मोटर मार्ग के नीचे स्थित भूमि आवंटित की गई थी।
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महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान पिछले लगभग 34 वर्षों से उक्त भूमि का उपयोग एवं संरक्षण करता आ रहा है। गत माह एक बाहरी व्यक्ति ने उक्त भूमि पर काम शुरू कराया है। इस बाबत जानकारी करने पर संबंधित व्यक्ति ने दावा किया कि यह भूमि उसे स्यालगांव के कुछ निवासियों ने बेची है। पत्र में कहा गया है कि इससे भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
कॉलेज प्रशासन ने उच्च शिक्षा निदेशक से पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित करने, दान भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है जिससे भविष्य में किसी प्रकार के अतिक्रमण अथवा विवाद की आशंका न हो। पीटीए सदस्य प्रकाश का कहना है कि यह भूमि क्षेत्र में उच्च शिक्षा की स्थापना और विकास से जुड़ी हुई है। ऐसे में दान भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण जनभावनाओं से जुड़ा विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्राचार्य प्रो. एलआर राजवंशी ने बताया कि भूमि विवाद के संबंध में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराते हुए कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। महाविद्यालय प्रशासन संस्थान की भूमि एवं परिसंपत्तियों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। शासन व विभागीय स्तर पर आवश्यक पत्राचार किया जा चुका है। मामले की जांच रिपोर्ट मिलने पर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।