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Kotdwar News: लैंसडौन का नाम जसवंतगढ़ करने के लिए मांगी आपत्तियां व सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sat, 18 Apr 2026 06:07 PM IST
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कैंट बोर्ड में बीती 10 अप्रैल को रखा गया प्रस्ताव
अंग्रेजों के रखे गए शहरों के नाम बदलने की कवायद
लैंसडौन। अंग्रेजों के नाम पर रखे गए शहरों के नाम परिवर्तन की कवायद एक बार फिर से शुरू हो गई है। इसी क्रम में कैंट बोर्ड ने लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ छावनी किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। बीती 10 अप्रैल की बोर्ड बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव में 30 दिन के भीतर नाम परिवर्तन के बारे में आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। आपत्ति व सुझाव मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) के नाम से कैंट बोर्ड कार्यालय में लिखित और ईमेल से प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
छावनी परिषद लैंसडौन के सीईओ हर्षित राज सिंह ने बताया कि राइफलमैन जसवंत सिंह रावत महावीर चक्र 1962 के युद्ध के सम्मान में नागरिकों में देशभक्ति, वीरता की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लैंसडौन का नाम परिवर्तन कर जसवंतगढ़ करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इस बारे में सार्वजनिक सूचनाएं भी प्रकाशित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन के बारे में स्थानीय नागरिक व हितधारक 30 दिन के भीतर अपनी आपत्तियां व सुझाव मुख्य अधिशासी अधिकारी के नाम से कैंट बोर्ड कार्यालय में लिखित व ईमेल से प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित अवधि के बाद आपत्तियों व सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा। नाम परिवर्तन का उद्देश्य नागरिकों में देशभक्ति, वीरता की भावना को प्रोत्साहित करना है। बीती 10 अप्रैल को पारित यह प्रस्ताव तीन सदस्यों वाली तदर्थ कमेटी की बैठक में पारित हुआ है।
अंग्रेजों व मुगलों के नाम पर रखे गए नामों को बदलने की चल रही कवायद
दरअसल, केंद्र सरकार अंग्रेजों व मुगलों के नामों को बनाए रखने के पक्ष में नहीं है। इसी क्रम में लैंसडौन का नाम परिवर्तन करने के कई प्रस्तावों पर विचार हुआ। पहले इसका पौराणिक नाम कालौडांडा रखने की मांग ने भी जोर पकड़ा। इसके बाद लाट सुबेदार बलभद्र सिंह नेगी और देश के प्रथम सीडीसी जनरल बिपिन रावत के नाम की भी चर्चाएं रही। अब हीरो ऑफ द नेफा 1962 के युद्ध के नायक राइफलमैन जसवंत सिंह रावत महावीर चक्र के नाम पर अंतिम मुहर लगी है। माना जा रहा है कि लैंसडौन का नाम अब जसवंत गढ़ छावनी हो जाएगा। अलबत्ता, पर्यटन के क्षेत्र में लैंसडौन विश्वभर में विख्यात हो चुका है जिससे व्यापारी, होटल कारोबार व जनप्रतिनिधि भी नाम परिवर्तन के विरोध में मुखर हो रहे हैं।
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अंग्रेजों के रखे गए शहरों के नाम बदलने की कवायद
लैंसडौन। अंग्रेजों के नाम पर रखे गए शहरों के नाम परिवर्तन की कवायद एक बार फिर से शुरू हो गई है। इसी क्रम में कैंट बोर्ड ने लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ छावनी किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। बीती 10 अप्रैल की बोर्ड बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव में 30 दिन के भीतर नाम परिवर्तन के बारे में आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। आपत्ति व सुझाव मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) के नाम से कैंट बोर्ड कार्यालय में लिखित और ईमेल से प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
छावनी परिषद लैंसडौन के सीईओ हर्षित राज सिंह ने बताया कि राइफलमैन जसवंत सिंह रावत महावीर चक्र 1962 के युद्ध के सम्मान में नागरिकों में देशभक्ति, वीरता की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लैंसडौन का नाम परिवर्तन कर जसवंतगढ़ करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इस बारे में सार्वजनिक सूचनाएं भी प्रकाशित की गई हैं।
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उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन के बारे में स्थानीय नागरिक व हितधारक 30 दिन के भीतर अपनी आपत्तियां व सुझाव मुख्य अधिशासी अधिकारी के नाम से कैंट बोर्ड कार्यालय में लिखित व ईमेल से प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित अवधि के बाद आपत्तियों व सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा। नाम परिवर्तन का उद्देश्य नागरिकों में देशभक्ति, वीरता की भावना को प्रोत्साहित करना है। बीती 10 अप्रैल को पारित यह प्रस्ताव तीन सदस्यों वाली तदर्थ कमेटी की बैठक में पारित हुआ है।
अंग्रेजों व मुगलों के नाम पर रखे गए नामों को बदलने की चल रही कवायद
दरअसल, केंद्र सरकार अंग्रेजों व मुगलों के नामों को बनाए रखने के पक्ष में नहीं है। इसी क्रम में लैंसडौन का नाम परिवर्तन करने के कई प्रस्तावों पर विचार हुआ। पहले इसका पौराणिक नाम कालौडांडा रखने की मांग ने भी जोर पकड़ा। इसके बाद लाट सुबेदार बलभद्र सिंह नेगी और देश के प्रथम सीडीसी जनरल बिपिन रावत के नाम की भी चर्चाएं रही। अब हीरो ऑफ द नेफा 1962 के युद्ध के नायक राइफलमैन जसवंत सिंह रावत महावीर चक्र के नाम पर अंतिम मुहर लगी है। माना जा रहा है कि लैंसडौन का नाम अब जसवंत गढ़ छावनी हो जाएगा। अलबत्ता, पर्यटन के क्षेत्र में लैंसडौन विश्वभर में विख्यात हो चुका है जिससे व्यापारी, होटल कारोबार व जनप्रतिनिधि भी नाम परिवर्तन के विरोध में मुखर हो रहे हैं।

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