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गाद खा जाएगी नैनी झील को

Nainital Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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नैनीताल। नैनी झील में प्रतिवर्ष 67 से 80 घनमीटर गाद, रेता, बजरी समाकर इसकी गहराई को कम कर रही है। अगर इसी औसत से गाद झील में जाती रही तो आने वाले 114 साल में नैनी झील का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। नैनी झील को प्रदूषण मुक्त करने व झील में जमा हो रही गाद के नियंत्रण के लिए आने वाले समय में जर्मन तकनीक क ा इस्तेमाल होगा। इंडो जर्मन लेक कन्जर्वेशन, इनिशिऐटिव फार कन्जर्वेशन आफ नैनीताल, लेक परियोजना के तहत पब्लिक प्राइवेट पीपल पार्टनरशिप (पीपीपीपी मोड) से जर्मन तकनीक द्वारा नैनी झील को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा। इस परियोजना में जर्मन सरकार द्वारा आर्थिक रूप मदद की जाएगी।

यहंा मनुमहरानी होटल में पत्रकारों को संबोधित करते हुए इंडो जर्मन लेक कन्जर्वेशन इनिशिऐटिव नैनीताल के समन्वयक व कुविवि भूगोल विभाग के प्रो.पीसी तिवारी ने कहा कि जर्मन सरकार द्वारा दुनिया की कई झीलों के संरक्षण व संवर्धन में मदद की जा रही है। इस प्रोेजेक्ट के तहत नैनी झील का संरक्षण किया जान प्रस्तावित है।जर्मन सरकार की आर्थिक मदद से प्र्रोजेक्ट में यूनिवर्सिटी आफ पाट्स डैम, कुविवि भूगोल विभाग, हाइड्रो कनसल्टेंसी जर्मनी समेत जल संस्थान व जल निगम काम कर रहा है।

प्रो. तिवारी ने बताया कि जर्मन के विशेषज्ञ ओसवर्ड ब्लूमिसटिन, हाइड्रोलाजिक्ल कनसल्टेंट ओले ग्रेगोरी समेत कुविवि के विषय विशेषज्ञों ने पूर्व में नैनी झील का सर्वे किया। इस सर्वे के अनुसार प्रतिवर्ष 67 से 80 घनमीटर गाद, रेता, बजरी, मिट्टी झील में समा रही हैं। अगर इसी औसत से गाद झील में समाती रही तो 114 वर्ष बाद झील का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। सोमवार को जर्मन विशेषज्ञों व कुविवि के प्रोफेसरों ने पुन: झील का निरीक्षण कर बैठक का आयोजन किया। तय किया गय कि मार्च 2013 तक झील को प्रदूषण मुक्त बनाने समेत उसके संरक्षण के लिए उपायाें की रिपोर्ट जर्मनी भेजी जाएगी।
इस दौरान कु विवि परिसर निदेशक बीआर कौशल, प्रो. गंगा बिष्ट, बीएल साह,पीके गुप्ता,बीएस कोटलिया, पीएस बिष्ट,आरके पांडे, आरसी जोशी समेत मुख्य अभियंता पेयजल सुशील कुमार, एलएम खन्ना, केएस बिष्ट, विवेेेक भट्ट, रमेश चंद्रा, अधिशासी अभियंता जल संस्थान एसके गुर्रानी आदि उपस्थित थे। संचालन प्रो. तिवारी ने किया।

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