सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Cultivation of exotic fruits will sweeten orchardists' income.

Nainital News: विदेशी फलों की खेती से बागवानों की आय में बढ़ेगी मिठास

संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Fri, 19 Jun 2026 12:59 AM IST
विज्ञापन
Cultivation of exotic fruits will sweeten orchardists' income.
विज्ञापन
नैनीताल। मौसम की मार और संसाधनों से जूझ रहे पहाड़ के बागवानों के लिए नई राह खुलने जा रही है। पारंपरिक फसलों के इतर किसानों की आय बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) नैनीताल के पर्वतीय क्षेत्रों में विदेशी फलों की खेती की एक नई पहल शुरू की है। यह प्रयोग न सिर्फ पहाड़ों में कृषि का स्वरूप बदलेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

ब्यूरो ने विदेशी फलों की ऐसी प्रजातियों पर काम शुरू किया है जिन्हें पर्वतीय जलवायु में उगाया जा सकता है। इनमें दक्षिण अमेरिका के पेपिनो और पैशन फ्रूट के साथ जापान का परसिमों प्रमुख है। इन फलों की खेती फिलहाल परीक्षण और प्रदर्शन स्तर पर की जा रही है ताकि उनकी उत्पादकता, गुणवत्ता और स्थानीय परिस्थितियों में अनुकूलता का आकलन किया जा सके। एनबीपीजीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. राहुल देव के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों की जलवायु और तापमान कई उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के लिए अनुकूल हो सकते हैं। यदि ये प्रयोग सफल होते हैं तो किसानों के सामने पारंपरिक अनाज और सीमित बागवानी से आगे बढ़कर व्यावसायिक विकल्प खुल सकते हैं। इन फलों की खेती के लिए किसानों के बीच इन्हें प्रदर्शित किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


जानिए फलों के गुण और डिमांड
पेपिनो स्वाद में खरबूजा और नाशपाती जैसा हल्का मीठा है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है इसलिए गर्म मौसम में ताजगी देने वाला फल माना जाता है। पैशन फ्रूट विटामिन ए और सी से भरपूर होता है। यह एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। लंबे समय से स्वास्थ्य और वेलनेस उत्पादों में इस फल की मांग बढ़ रही है। परसिमों को प्रीमियम फल श्रेणी में माना जाता है जिसकी बाजार कीमत कई पारंपरिक फलों से अधिक हो सकती है। यह स्वाद में मीठा और मुलायम होता है। इसमें फाइबर, विटामिन ए और सी का अच्छा स्रोत माना जाता है।
विज्ञापन


मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था की जरूरत
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल नई फसलें उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। किसानों को पौध, प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और बाजार से जोड़ना भी उतना ही जरूरी होगा। यदि उत्पादन तो हो जाए लेकिन मार्केटिंग व्यवस्था मजबूत न हो तो किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। पहाड़ी राज्यों में बढ़ते पलायन के बीच कृषि को लाभकारी बनाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में फसल विविधीकरण और उच्च मूल्य वाली बागवानी को समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed