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Nainital News: जमरानी योजना में मलबा प्रबंधन बना नई चुनौती
Mon, 03 Aug 2026 02:08 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:08 AM IST
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जमरानी बांध स्थल से निकला मलबा यहां भौर्सा में भनिस्तारित किया गयाफोटो: पीआईयू
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हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना के निर्माण से निकलने वाले मलबे के निस्तारण के लिए अब एक और स्थल की दरकार है। परियोजना से निकल रहा मलबा लगातार बढ़ रहा है जिससे मौजूदा निस्तारण स्थल तेजी से भर रहे हैं।
परियोजना प्रबंधक अजय पंत ने बताया कि मलबे के निस्तारण के लिए पहला स्थल भौंर्सा में चिह्नित किया गया था। वह स्थल अब पूरी तरह भर चुका है। खनन विभाग की ओर से उसकी निविदा प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है लेकिन अब तक मलबे का उठान शुरू नहीं हो सका है। दूसरा निस्तारण स्थल भी इसी क्षेत्र में करीब डेढ़ हेक्टेयर में है। यह स्थल भी 80 प्रतिशत तक भर चुका है और इस महीने के अंत तक पूरी तरह भर जाने की संभावना है। ऐसे में परियोजना के काम की रफ्तार बनाए रखने के लिए नए स्थल की तत्काल आवश्यकता है। इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के सहयोग से तीसरा स्थल रौशिल में 11 हेक्टेयर क्षेत्र में चयनित किया गया है। एसडीएम की ओर से गठित समिति की ओर से स्थल का संयुक्त निरीक्षण भी किया जा चुका है। अब जिला प्रशासन से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही मलबा निस्तारण का कार्य नए स्थल पर शुरू कर दिया जाएगा।
समय पर मलबा निस्तारण न होने से परियोजना के निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन से अनुरोध है कि रौशिल वाले स्थल को जल्द स्वीकृति दी जाए। - अजय पंत, परियोजना प्रबंधक
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जमरानी बांध परियोजना से होने वाले लाभ
कुमाऊं के तराई और भाबर क्षेत्र की लगभग 57 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। हल्द्वानी, काठगोदाम आदि इलाकों के लिए पर्याप्त पेयजल पेयजल उपलब्ध होगा। गौला नदी में आने वाली बाढ़ से निचले क्षेत्रों को सुरक्षा मिलेगी। निर्माण और रखरखाव के दौरान स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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परियोजना प्रबंधक अजय पंत ने बताया कि मलबे के निस्तारण के लिए पहला स्थल भौंर्सा में चिह्नित किया गया था। वह स्थल अब पूरी तरह भर चुका है। खनन विभाग की ओर से उसकी निविदा प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है लेकिन अब तक मलबे का उठान शुरू नहीं हो सका है। दूसरा निस्तारण स्थल भी इसी क्षेत्र में करीब डेढ़ हेक्टेयर में है। यह स्थल भी 80 प्रतिशत तक भर चुका है और इस महीने के अंत तक पूरी तरह भर जाने की संभावना है। ऐसे में परियोजना के काम की रफ्तार बनाए रखने के लिए नए स्थल की तत्काल आवश्यकता है। इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के सहयोग से तीसरा स्थल रौशिल में 11 हेक्टेयर क्षेत्र में चयनित किया गया है। एसडीएम की ओर से गठित समिति की ओर से स्थल का संयुक्त निरीक्षण भी किया जा चुका है। अब जिला प्रशासन से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही मलबा निस्तारण का कार्य नए स्थल पर शुरू कर दिया जाएगा।
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समय पर मलबा निस्तारण न होने से परियोजना के निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन से अनुरोध है कि रौशिल वाले स्थल को जल्द स्वीकृति दी जाए। - अजय पंत, परियोजना प्रबंधक
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जमरानी बांध परियोजना से होने वाले लाभ
कुमाऊं के तराई और भाबर क्षेत्र की लगभग 57 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। हल्द्वानी, काठगोदाम आदि इलाकों के लिए पर्याप्त पेयजल पेयजल उपलब्ध होगा। गौला नदी में आने वाली बाढ़ से निचले क्षेत्रों को सुरक्षा मिलेगी। निर्माण और रखरखाव के दौरान स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।