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Nainital News: बच्चों पर अनावश्यक अपेक्षाओं का बोझ न डालें
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डीएम रयाल ने बोर्ड परीक्षार्थियों को दी अग्रिम शुभकामनाएं
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिले के समस्त बोर्ड परीक्षार्थियों को अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने परीक्षार्थियों तथा उनके अभिभावकों से परीक्षा के मद्देनजर संयम, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की अपील की है।
अपने संदेश में डीएम ने कहा कि परीक्षा जीवन की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव अवश्य है, किंतु इसे भय, तनाव अथवा असहनीय दबाव का कारण नहीं बनने दिया जाना चाहिए। परीक्षाएँ ज्ञान और अभ्यास की परख होती है, न कि किसी छात्र के व्यक्तित्व, प्रतिभा या भविष्य का अंतिम निर्णय।
उन्होंने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे अपनी दिनचर्या को सरल, संतुलित और नियमित रखें। पर्याप्त विश्राम, समयबद्ध अध्ययन और स्वस्थ मन:स्थिति के साथ परीक्षा देने से ही वास्तविक क्षमता का श्रेष्ठ प्रदर्शन संभव होता है। अत्यधिक अंक प्राप्त करने की चिंता कई बार सहज ज्ञान को भी बाधित कर देती है, जबकि स्वाभाविक और शांत मन से किया गया प्रयास अधिक प्रभावी सिद्ध होता है।
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक अपेक्षाओं का बोझ न डालें। इस समय बच्चों को दबाव या भय नहीं, बल्कि विश्वास, सहारा और स्नेह की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता भिन्न होती है और सफलता के मार्ग भी अनेक हैं, यह समझ विकसित करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि अंक जीवन का एक पड़ाव निर्धारित कर सकते हैं, किंतु जीवन की दिशा नहीं। संयम, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही दीर्घकालीन सफलता की आधारशिला होती है।
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माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिले के समस्त बोर्ड परीक्षार्थियों को अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने परीक्षार्थियों तथा उनके अभिभावकों से परीक्षा के मद्देनजर संयम, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की अपील की है।
अपने संदेश में डीएम ने कहा कि परीक्षा जीवन की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव अवश्य है, किंतु इसे भय, तनाव अथवा असहनीय दबाव का कारण नहीं बनने दिया जाना चाहिए। परीक्षाएँ ज्ञान और अभ्यास की परख होती है, न कि किसी छात्र के व्यक्तित्व, प्रतिभा या भविष्य का अंतिम निर्णय।
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उन्होंने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे अपनी दिनचर्या को सरल, संतुलित और नियमित रखें। पर्याप्त विश्राम, समयबद्ध अध्ययन और स्वस्थ मन:स्थिति के साथ परीक्षा देने से ही वास्तविक क्षमता का श्रेष्ठ प्रदर्शन संभव होता है। अत्यधिक अंक प्राप्त करने की चिंता कई बार सहज ज्ञान को भी बाधित कर देती है, जबकि स्वाभाविक और शांत मन से किया गया प्रयास अधिक प्रभावी सिद्ध होता है।
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक अपेक्षाओं का बोझ न डालें। इस समय बच्चों को दबाव या भय नहीं, बल्कि विश्वास, सहारा और स्नेह की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता भिन्न होती है और सफलता के मार्ग भी अनेक हैं, यह समझ विकसित करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि अंक जीवन का एक पड़ाव निर्धारित कर सकते हैं, किंतु जीवन की दिशा नहीं। संयम, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही दीर्घकालीन सफलता की आधारशिला होती है।