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Nainital News: पर्वतीय इलाकों में भी डिप्रेशन और एंग्जायटी के शिकार हो रहे युवा
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:21 AM IST
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धानाचूली (नैनीताल)। कुछ समय से युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं लेकिन इसके बावजूद अधिकतर लोग डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षणों को पहचान नहीं पा रहे हैं। पदमपुरी स्थित अस्पताल में हर सप्ताह 12 से अधिक 22 से 35 साल के युवा मरीज इन समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक अधिकतर लोग डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसे मानसिक विकारों को सामान्य तनाव या कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं जिससे समस्या गंभीर रूप ले लेती है। युवाओं में घबराहट, बेचैनी, अनिद्रा, लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित न कर पाने जैसे लक्षण प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि बदलती जीवनशैली, आर्थिक दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक कारण इन समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए संकोच और सामाजिक झिझक भी एक बड़ी वजह है और इस कारण लोग समय पर इलाज नहीं ले पा रहे हैं।
केस- 1
सूपी गांव की युुवती पिछले कई महीनों से लगातार घबराहट, नींद न आना और बिना वजह डर महसूस कर रही थी। परिवार ने इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज किया। हालत बिगड़ने पर जब उसे पदमपुरी अस्पताल लाया गया तब डॉक्टरों ने उसे एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित बताया।
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केस- 2
धानाचूली के युवक ने काम में रुचि खो दी थी और अक्सर उदासी में रहने लगा था। परिवार को लगा कि यह सिर्फ थकान या तनाव है लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्थिति बिगड़ती गई। अस्पताल में परामर्श के बाद डिप्रेशन के लक्षण मिलने पर उसका इलाज शुरू किया गया।
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लोगों में अभी भी जागरूकता की कमी है और इस कारण वे देर से इलाज के लिए आते हैं। अगर किसी को लंबे समय तक उदासी, घबराहट, नींद की समस्या या व्यवहार में बदलाव महसूस हो, तो वह डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से इन समस्याओं को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. हिमांशु कांडपाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पदमपुरी
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चिकित्सकों के मुताबिक अधिकतर लोग डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसे मानसिक विकारों को सामान्य तनाव या कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं जिससे समस्या गंभीर रूप ले लेती है। युवाओं में घबराहट, बेचैनी, अनिद्रा, लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित न कर पाने जैसे लक्षण प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि बदलती जीवनशैली, आर्थिक दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक कारण इन समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए संकोच और सामाजिक झिझक भी एक बड़ी वजह है और इस कारण लोग समय पर इलाज नहीं ले पा रहे हैं।
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केस- 1
सूपी गांव की युुवती पिछले कई महीनों से लगातार घबराहट, नींद न आना और बिना वजह डर महसूस कर रही थी। परिवार ने इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज किया। हालत बिगड़ने पर जब उसे पदमपुरी अस्पताल लाया गया तब डॉक्टरों ने उसे एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित बताया।
केस- 2
धानाचूली के युवक ने काम में रुचि खो दी थी और अक्सर उदासी में रहने लगा था। परिवार को लगा कि यह सिर्फ थकान या तनाव है लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्थिति बिगड़ती गई। अस्पताल में परामर्श के बाद डिप्रेशन के लक्षण मिलने पर उसका इलाज शुरू किया गया।
लोगों में अभी भी जागरूकता की कमी है और इस कारण वे देर से इलाज के लिए आते हैं। अगर किसी को लंबे समय तक उदासी, घबराहट, नींद की समस्या या व्यवहार में बदलाव महसूस हो, तो वह डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से इन समस्याओं को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. हिमांशु कांडपाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पदमपुरी

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