Haldwani: बाल और खून के नमूने करेंगे, बाघ के आदमखोर होने की तस्दीक; वन्यजीव को ढेला रेस्क्यू सेंटर भेजा
पनियाली के जंगल से ट्रैंकुलाइज किए गए बाघ को वन विभाग ने ढेला रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। बाघ और मारी गई महिलाओं के बाल व खून के सैंपल भी जांच के लिए देहरादून स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
विस्तार
पनियाली के जंगल से मंगलवार की रात ट्रैंकुलाइज किए गए बाघ को वन विभाग ने ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में भेज दिया है। बाघ और मारी गई महिलाओं के बाल व खून के सैंपल भी जांच के लिए देहरादून स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। प्रयोगशाला में जांच के बाद ही इसकी पुष्टि होगी कि दो महिलाओं को मौत के घाट उतारने वाला यही बाघ है या फिर किसी दूसरे वन्यजीव ने उन्हें निवाला बनाया था।
पिछले माह 12 फरवरी को पनियाली के जंगल में बाघ ने पीपलपोखरा गांव निवासी गंगा देवी और 25 फरवरी को पनियाली गांव निवासी कमला फर्त्याल को मौत के घाट उतार दिया था। दोनों महिलाएं अपने मवेशियों के लिए चारा लेने जंगल गई थीं। इसके बाद से वन विभाग की टीमों ने जानमाल की सुरक्षा को देखते हुए क्षेत्र में गश्त शुरू कर दी। जंगल में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए। मंगलवार रात पनियाली के जंगल से वन विभाग की टीम ने एक बाघ को ट्रैंकुलाइज किया।
पकड़े गए बाघ को ढेला रेस्क्यू सेंटर में भेजा गया है। उन्होंने बताया कि बाघ और मारी गईं महिलाओं के बाल व खून के सैंपल जांच के लिए देहरादून स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। प्रयोगशाला में जांच के बाद ही पता चलेगा कि महिलाओं को मारने वाला बाघ यही है या फिर कोई और। - प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव मर्तोलिया
जंगल के भीतर जाने से बचें ग्रामीण
प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव मर्तोलिया ने बताया कि बाघ के पकड़े जाने के बाद भी विभागीय टीमें जंगल और उससे लगे आबादी क्षेत्र में गश्त कर लोगों को मानव वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम के लिए जागरूक कर रही हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वह जंगल के भीतर जाने से परहेज करें।
वन्य जीवों के मूवमेंट पर अब भी विभाग की नजर
पनियाली के जंगल से एक बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के बाद भी वन विभाग वहां लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से वन्य जीवों के मूवमेंट पर नजर रख रहा है। डीएफओ ने बताया कि जंगल क्षेत्र में अभी भी 34 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
पशुपालकों को उपलब्ध कराया चारा
वनाधिकारियों ने बताया कि पनियाली के जंगल से लगे आबादी क्षेत्र में रह रहे पशुपालकों को विभाग की ओर से चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि पशुपालक चारे के लिए जंगल में न भटकें और मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं न हों।