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Nainital News: कुमाऊं की माटी और महिलाओं को प्रेरणास्रोत मानते हैं प्रसून जोशी

संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Mon, 04 May 2026 12:55 AM IST
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Prasoon Joshi regards the soil and women of Kumaon as sources of inspiration.
कुमाऊं विवि में प्रसून जोशी को मानद उपाधि देतीं तत्कालीन राजयपाल बेबी रानी मौर्य।
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नैनीताल। प्रसार भारती के अध्यक्ष बनाए गए गीतकार प्रसून जोशी कुमाऊं की माटी और महिलाओं को प्रेरणास्रोत मानते हैं। उनका कहना है कि यहां के वातावरण, नदियों, महिलाओं और परंपराओं ने उन्हें लेखन में प्रेरणा और कल्पना प्रदान की। उन्होंने कुमाऊंनी के शब्दों का इस्तेमाल आपने लेखन में भी किया है।

कुमाऊं मूल के प्रसून जोशी ने ये बातें कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से 29 नवंबर 2018 को 15वें दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि प्रदान करने के अवसर पर कहीं थीं। इसमें तत्कालीन कुलपति प्रो. डीके नौडियाल के प्रस्ताव और सुझाव पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने प्रसून जोशी को डीलिट की मानद उपाधि प्रदान की थी। इस अवसर पर प्रसून ने कहा था कि महिला सशक्तीकरण पर दूसरे राज्यों को उत्तराखंड से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां महिलाएं पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर हैं। जिस तरह की शक्तिशाली और जुझारू महिलाएं प्रदेश में देखने को मिलती हैं वैसी महिलाएं कहीं भी नहीं देखी जातीं। उन्होंने महिलाओं पर अपनी कविता सुनाते हुए कहा कि सने हाथ माटी की खुशबू लिए, रची धूप माथे पर बूंदे लिए, जाने कितने बाजू तू बांहों में लिए, कितनी राहत तू अपनी छाहों में लिए।
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पहाड़ के इंसान निश्छल, बाहर जाकर समझ आता है छल

उन्होंने पहाड़ के इंसानों को निश्छल और विनम्र बताते हुए कहा था कि उसे छल का पता तब चलता है जब वह बाहर निकलता है। बताया था कि उनका बचपन अल्मोड़ा में वन और नदियों, जागेश्वर, चितई और उधर मंदाकिनी, अलकनंदा के इर्द-गिर्द बीता है। कुमाऊंनी भाषा उनकी धमनियों में दौड़ती है। उन्होंने बताया था कि इस माहौल से मिली प्रेरणा से उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में पहला कविता संग्रह प्रकाशित किया था। वह डायरी पर हाथ से लिखना पसंद करते हैं, इससे विचार ज्यादा स्वाभाविक रूप से आते हैं।



तू धूप है झम से बिखर में कुमाऊंनी का उदाहरण

प्रसून जोशी ने तारे जमीन पर फिल्म में आपने लिखे गीत ''''''''तू धूप है झम से बिखर'''''''' में झम शब्द कुमाऊंनी भाषा से लिए होने का उदाहरण देते हुए बताया था कि यहां उनकी भावना को इससे बेहतर किसी भी शब्द से नहीं समझाया जा सकता था।
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