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Nainital News: जिला जज ने तेंदुए की खाल की तस्करी के दोषी की सजा को बरकरार रखा
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 19 Jun 2026 12:57 AM IST
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नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी की न्यायालय ने तेंदुए की खाल और हड्डियों की तस्करी के दोषी की सजा को बरकरार रखा है। न्यायालय ने आरोपी की अपील को खारिज कर दिया। न्यायालय ने आरोपी को शेष सजा पूरी करने के लिए जेल भेजने के आदेश दिए हैं।
इस वर्ष नौ जनवरी एसटीएफ कुमाऊं यूनिट और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर बारापत्थर-पंगूट मार्ग पर घेराबंदी की थी। कार्रवाई के दौरान महेश सिंह कपकोटी निवासी कपकोट, बागेश्वर को पकड़ा था। तलाशी में उसके पास मौजूद कट्टे से तेंदुए की दो तें खालें और करीब 4.350 किलोग्राम हड्डियां बरामद हुई थीं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह बरामद वन्यजीव अंगों को बेचने के उद्देश्य से बागेश्वर से नैनीताल लाया था और ग्राहक का इंतजार कर रहा था।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल ने बीती 26 मई को आरोपी को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। दोषी ने जिला जज की न्यायालय में चुनौती दी। अदालत ने कहा कि बरामदगी के दौरान की गई डिजिटल वीडियोग्राफी और भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून की वैज्ञानिक रिपोर्ट आरोपों का मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य हैं।
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इस वर्ष नौ जनवरी एसटीएफ कुमाऊं यूनिट और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर बारापत्थर-पंगूट मार्ग पर घेराबंदी की थी। कार्रवाई के दौरान महेश सिंह कपकोटी निवासी कपकोट, बागेश्वर को पकड़ा था। तलाशी में उसके पास मौजूद कट्टे से तेंदुए की दो तें खालें और करीब 4.350 किलोग्राम हड्डियां बरामद हुई थीं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह बरामद वन्यजीव अंगों को बेचने के उद्देश्य से बागेश्वर से नैनीताल लाया था और ग्राहक का इंतजार कर रहा था।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल ने बीती 26 मई को आरोपी को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। दोषी ने जिला जज की न्यायालय में चुनौती दी। अदालत ने कहा कि बरामदगी के दौरान की गई डिजिटल वीडियोग्राफी और भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून की वैज्ञानिक रिपोर्ट आरोपों का मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य हैं।