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Nainital News: नैनीताल में स्थापित राजकीय निर्माण इकाई सुगम से हुई दुर्गम
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 04 May 2026 12:52 AM IST
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नैनीताल। ब्रिटिश काल से सुगम श्रेणी में गिना जाने वाला नैनीताल का लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) अब दुर्गम घोषित कर दिया गया है। 131 साल बाद हुए इस श्रेणी परिवर्तन ने विभाग में स्टाफ की कमी को दूर होने की उम्मीद जगा दी है।
अब तक नैनीताल मंडल मुख्यालय सुगम श्रेणी में होने के कारण अधिकारियों और अभियंताओं की पहली पसंद नहीं बन पा रहा था। यहां नियुक्ति पाने वाले कर्मचारी अक्सर राजनीतिक जुगाड़ या पैरवी का सहारा लेकर हल्द्वानी, रुद्रपुर और रामनगर जैसे मैदानी शहरों में तबादला करवा लेते थे। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा था। अब दुर्गम होने के बाद लोग कठिन भौगोलिक इलाकों के बजाय नैनीताल में दुर्गम में ड्यूटी देना पसंद करेंगे।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, स्टाफ की कमी की स्थिति काफी चिंताजनक रही है। प्रांतीय खंड में स्वीकृत 16 अवर अभियंताओं (जेई) के पदों में से केवल 6 तैनात हैं जिनमें से दो हाईकोर्ट की ड्यूटी में रहते हैं। वहीं, निर्माण खंड में 14 पदों के सापेक्ष मात्र चार अभियंता ही मोर्चा संभाले हुए हैं।
रिक्त पद भरने की तैयारी
हाल ही विभाग को नए प्रधान सहायक और ड्राफ्टमैन मिल चुके हैं। जून तक सीधी भर्ती के जरिये अवर अभियंताओं के सभी रिक्त पदों को भरने की तैयारी है। इकाई के दुर्गम होने से अब स्थानांतरण नीति के तहत अभियंताओं को यहां अनिवार्य रूप से सेवाएं देनी होंगी। इससे पंगूट, कैंची और गरमपानी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में लंबित पड़े निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और आम जनता को राहत मिलेगी।
1895 से कार्यरत है निर्माण इकाई
इतिहासकार प्रो.अजय रावत बताते हैं कि नैनीताल की खोज के बाद 1841 में यहां नगरीकरण की शुरुआत हुई। 1850 में पालिका के गठन के बाद निर्माण कार्य पालिका के अधीन थे। 1862 में नैनीताल उत्तर पश्चिम वृत अवध की ग्रीष्मकालीन राजधानी बना। 1890 के दशक में यह कुमाऊं डिविजन बना। इसके बाद राज्य निर्माण से पूर्व यह सार्वजनिक निर्माण विभाग था और राज्य निर्माण के बाद लोक निर्माण विभाग हुआ।
-नैनीताल के सुगम से दुर्गम बनने के बाद यहां कार्यरत लोनिवि प्रांतीय खंड और निर्माण खंड को अभियंता एवं स्टाफ समेत द्वितीय वृत को भी स्वीकृति के सापेक्ष अधिकारी व कार्मिक मिलने की उम्मीद जगी है।
मनोहर सिंह, अधीक्षण अभियंता द्वितीय वृत
-नैनीताल के दुर्गम होने के बाद यहां अधिकारियों की कमी से निजात मिलेगी। नई भर्ती के बाद नियुक्ति में दुर्गम के लिए बाध्यता से अभियंता अथवा पहाड़ों के अन्य स्थलों के सापेक्ष नैनीताल आना फायदेमंद होगा। रत्नेश सक्सेना अधिशासी अभियंता लोनिवि
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अब तक नैनीताल मंडल मुख्यालय सुगम श्रेणी में होने के कारण अधिकारियों और अभियंताओं की पहली पसंद नहीं बन पा रहा था। यहां नियुक्ति पाने वाले कर्मचारी अक्सर राजनीतिक जुगाड़ या पैरवी का सहारा लेकर हल्द्वानी, रुद्रपुर और रामनगर जैसे मैदानी शहरों में तबादला करवा लेते थे। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा था। अब दुर्गम होने के बाद लोग कठिन भौगोलिक इलाकों के बजाय नैनीताल में दुर्गम में ड्यूटी देना पसंद करेंगे।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, स्टाफ की कमी की स्थिति काफी चिंताजनक रही है। प्रांतीय खंड में स्वीकृत 16 अवर अभियंताओं (जेई) के पदों में से केवल 6 तैनात हैं जिनमें से दो हाईकोर्ट की ड्यूटी में रहते हैं। वहीं, निर्माण खंड में 14 पदों के सापेक्ष मात्र चार अभियंता ही मोर्चा संभाले हुए हैं।
रिक्त पद भरने की तैयारी
हाल ही विभाग को नए प्रधान सहायक और ड्राफ्टमैन मिल चुके हैं। जून तक सीधी भर्ती के जरिये अवर अभियंताओं के सभी रिक्त पदों को भरने की तैयारी है। इकाई के दुर्गम होने से अब स्थानांतरण नीति के तहत अभियंताओं को यहां अनिवार्य रूप से सेवाएं देनी होंगी। इससे पंगूट, कैंची और गरमपानी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में लंबित पड़े निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और आम जनता को राहत मिलेगी।
1895 से कार्यरत है निर्माण इकाई
इतिहासकार प्रो.अजय रावत बताते हैं कि नैनीताल की खोज के बाद 1841 में यहां नगरीकरण की शुरुआत हुई। 1850 में पालिका के गठन के बाद निर्माण कार्य पालिका के अधीन थे। 1862 में नैनीताल उत्तर पश्चिम वृत अवध की ग्रीष्मकालीन राजधानी बना। 1890 के दशक में यह कुमाऊं डिविजन बना। इसके बाद राज्य निर्माण से पूर्व यह सार्वजनिक निर्माण विभाग था और राज्य निर्माण के बाद लोक निर्माण विभाग हुआ।
-नैनीताल के सुगम से दुर्गम बनने के बाद यहां कार्यरत लोनिवि प्रांतीय खंड और निर्माण खंड को अभियंता एवं स्टाफ समेत द्वितीय वृत को भी स्वीकृति के सापेक्ष अधिकारी व कार्मिक मिलने की उम्मीद जगी है।
मनोहर सिंह, अधीक्षण अभियंता द्वितीय वृत
-नैनीताल के दुर्गम होने के बाद यहां अधिकारियों की कमी से निजात मिलेगी। नई भर्ती के बाद नियुक्ति में दुर्गम के लिए बाध्यता से अभियंता अथवा पहाड़ों के अन्य स्थलों के सापेक्ष नैनीताल आना फायदेमंद होगा। रत्नेश सक्सेना अधिशासी अभियंता लोनिवि
