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Nainital News: तीन करोड़ की मशीन पर दर्द स्कैन करने वाला नहीं
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नैनीताल। पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ पा रहीं हैं। नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से स्थापित सीटी स्कैन मशीन तकनीशियन के अभाव में बंद पड़ी है। करोड़ों की मशीन होने के बावजूद मरीजों को जांच के लिए हल्द्वानी और अन्य शहरों का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त होने के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्ष 2022 में डॉक्टर्स फॉर यू और क्रिप्टो रिलीफ संस्था की ओर से बीडी पांडे अस्पताल में लगभग पौने तीन करोड़ रुपये की लागत से सीटी स्कैन यूनिट स्थापित की गई थी। यूनिट के संचालन के लिए एक तकनीशियन भी अस्पताल को दिया गया था। मशीन लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब गंभीर मरीजों को जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और पहाड़ में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी। तकनीशियन का अनुबंध समाप्त होने के बाद मशीन शोपीस बन गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सीटी स्कैन मशीन के संचालन के लिए तकनीशियन की व्यवस्था भी संस्था की ओर से ही की गई थी। मार्च में तकनीशियन का अनुबंध समाप्त होने के बाद अस्पताल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल प्रशासन के पास न तो तकनीशियन का स्वीकृत पद है और न ही अलग से कर्मचारी रखने का बजट। नतीजा यह हुआ कि सीटी स्कैन जांच बंद हा गई है।
मरीजों को भेजा जा रहा अन्यत्र
सीटी स्कैन जैसी सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। सड़क दुर्घटना, सिर में चोट, ब्रेन स्ट्रोक और कई गंभीर बीमारियों के मामलों में तत्काल सीटी स्कैन जरूरी होता है। यह जांच बंद होने से मरीजों को हल्द्वानी भेजा जा रहा है। पहाड़ से हल्द्वानी तक का सफर गंभीर मरीजों के लिए मुश्किल और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत उलट है।
संस्था और तकनीशियन के बीच अनुबंध समाप्त हो चुका है। अस्पताल में सीटी स्कैन तकनीशियन का कोई पद स्वीकृत नहीं है। शासन स्तर पर तकनीशियन की मांग भेजी गई है।
डॉ. टीके टम्टा, पीएमएस, बीडी पांडे अस्पताल
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वर्ष 2022 में डॉक्टर्स फॉर यू और क्रिप्टो रिलीफ संस्था की ओर से बीडी पांडे अस्पताल में लगभग पौने तीन करोड़ रुपये की लागत से सीटी स्कैन यूनिट स्थापित की गई थी। यूनिट के संचालन के लिए एक तकनीशियन भी अस्पताल को दिया गया था। मशीन लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब गंभीर मरीजों को जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और पहाड़ में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी। तकनीशियन का अनुबंध समाप्त होने के बाद मशीन शोपीस बन गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सीटी स्कैन मशीन के संचालन के लिए तकनीशियन की व्यवस्था भी संस्था की ओर से ही की गई थी। मार्च में तकनीशियन का अनुबंध समाप्त होने के बाद अस्पताल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल प्रशासन के पास न तो तकनीशियन का स्वीकृत पद है और न ही अलग से कर्मचारी रखने का बजट। नतीजा यह हुआ कि सीटी स्कैन जांच बंद हा गई है।
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मरीजों को भेजा जा रहा अन्यत्र
सीटी स्कैन जैसी सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। सड़क दुर्घटना, सिर में चोट, ब्रेन स्ट्रोक और कई गंभीर बीमारियों के मामलों में तत्काल सीटी स्कैन जरूरी होता है। यह जांच बंद होने से मरीजों को हल्द्वानी भेजा जा रहा है। पहाड़ से हल्द्वानी तक का सफर गंभीर मरीजों के लिए मुश्किल और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत उलट है।
संस्था और तकनीशियन के बीच अनुबंध समाप्त हो चुका है। अस्पताल में सीटी स्कैन तकनीशियन का कोई पद स्वीकृत नहीं है। शासन स्तर पर तकनीशियन की मांग भेजी गई है।
डॉ. टीके टम्टा, पीएमएस, बीडी पांडे अस्पताल
