Uttarakhand News: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 10-15 साल के संविदा JE का होगा नियमितीकरण
नैनीताल हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में 10 से 15 वर्षों से कार्यरत संविदा जूनियर इंजीनियरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को उनके समायोजन और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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नैनीताल हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में दस से 15 वर्षों से कार्यरत संविदा जूनियर इंजीनियरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता संविदा कनिष्ठ अभियंताओं के समायोजन और उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार प्रसून नौटियाल व कई अन्य संविदा जूनियर इंजीनियरों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर कहा था कि वे 10-15 वर्षों से लोक निर्माण विभाग में संविदा पर कार्यरत थे, लेकिन विभाग ने उनकी संविदा अवधि का विस्तार न करते हुए उन्हें काम से हटा दिया था। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा उनके नियमितीकरण के दावों को भी खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें वापस सेवा में लिया जाए और उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि अंतरिम आदेशों के तहत 102 संविदा अभियंताओं को उपलब्ध पदों 83 रिक्त पदों तथा 19 पदोन्नति से बने पदों पर समायोजित कर लिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों के पास अंतरिम आदेश देरी से आए या नहीं आ सके, उन्हें वरिष्ठ होने के बावजूद सूची से बाहर कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल अंतरिम आदेश की तिथि के आधार पर किसी योग्य अभ्यर्थी को समायोजन से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया कि छूटे हुए सभी संविदा जूनियर इंजीनियरों को दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित 10 पदों पर जब तक कि नियमित अभ्यर्थी नहीं आ जाते और भविष्य में आने वाली रिक्तियों के सापेक्ष समायोजित किया जाए। साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं का समायोजन करने के पश्चात, उनके नियमितिकरण के पूर्व में खारिज किए गए दावों को दरकिनार करते हुए, नियमानुसार उनके नियमितिकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए।