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Nainital: दूरबीन से चंद्रग्रहण देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध, एरीज में चंद्र ग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग का आयोजन हुआ

संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Wed, 04 Mar 2026 10:11 AM IST
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सार

नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में चंद्रग्रहण के दौरान आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने इसे प्राकृतिक खगोलीय घटना बताते हुए लोगों की भ्रांतियां दूर कीं।

Viewers mesmerized by watching lunar eclipse through telescope in nainital
नैनीताल के एरीज से दिखा चन्द्र ग्रहण - फोटो : एरीज
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विस्तार

नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) में चंद्रग्रहण पर जन-जागरूकता कार्यक्रम और लाइव स्ट्रीमिंग का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने वैज्ञानिकों की उपस्थिति में खगोलीय घटना का अवलोकन किया। वैज्ञानिकों ने ग्रहण से जुड़ी पारंपरिक भ्रांतियों को दूर करते हुए इसे प्राकृतिक घटना बताया।

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चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 2:14 बजे शुरू हो गया था। हालांकि, उस समय चंद्रमा क्षितिज के नीचे होने के कारण उत्तराखंड सहित देश के अधिकतर हिस्सों में यह आंशिक रूप से ही देखा जा सका। शाम को चंद्रोदय के बाद विज्ञान केंद्र में प्रत्यक्ष अवलोकन की विशेष व्यवस्था की गई थी। एरीज के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र यादव ने ऑनलाइन व्याख्यान के माध्यम से चंद्रग्रहण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और इसके चरणों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। शाम 6:12 बजे चंद्रोदय हुआ लेकिन शुरुआत में हल्के कोहरे के कारण ग्रहण स्पष्ट नहीं दिख सका। जैसे ही चंद्रमा साफ नजर आने लगा, वहां मौजूद लागों में उत्साह नजर आया। लोगों ने दूरबीन के माध्यम से इस अद्भुत खगोलीय दृश्य का आनंद लिया। दूरबीनों के माध्यम से चंद्रमा के बदलते स्वरूप को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने चाय-बिस्किट का सेवन कर यह संदेश भी दिया कि ग्रहण के समय भोजन करना पूरी तरह सुरक्षित है। इस अवसर पर एरीज के शोध छात्र और इंटर्नशिप कर रहे छात्र भी उपस्थित रहे।

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भ्रांतियों का निवारण

डॉ. वीरेंद्र यादव ने अपने व्याख्यान में ग्रहण से जुड़ी कई गलत धारणाओं को दूर किया। उन्होंने बताया कि यह केवल पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के एक सीधी रेखा में आने का परिणाम है। ग्रहण के दौरान भोजन करने या किसी अन्य गतिविधि से स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। यह कार्यक्रम विज्ञान के प्रति लोगों की जिज्ञासा और जागरूकता को बढ़ाने में सहायक रहा।

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