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Pauri News: अस्पताल में खड़ी रही एंबुलेंस, रास्ते में टूट गईं दो जिंदगियां
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Thu, 29 Jan 2026 06:21 PM IST
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देवप्रयाग। पहाड़ों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की जान चली गई। ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कार्यरत यूपी निवासी विनोद की 31 वर्षीय पत्नी शिखा की 32 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान समय पर एम्बुलेंस न मिलने से मौत हो गई।
घटना बुधवार शाम करीब सात बजे की है। खाना बनाते समय शिखा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसके चिल्लाने पर पड़ोस में रहने वाले दुकानदार शीशपाल भंडारी जब कमरे में पहुंचे तो शिखा लहूलुहान हालत में थीं। उन्होंने तत्काल एक स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालक को बुलाया और अपनी निजी गाड़ी से शिखा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बागी पहुंचाया। इसी दौरान मेडिकल स्टोर संचालक ने 108 एम्बुलेंस सेवा पर भी कॉल की। अस्पताल पहुंचने तक शिखा होश में थीं और बातचीत कर रही थीं। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल श्रीनगर रेफर करने की सलाह दी। हालांकि अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस खड़ी होने के बावजूद प्रशासन ने यह कहकर वाहन उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया कि चालक छुट्टी पर है और एम्बुलेंस का स्टेयरिंग खराब है। शीशपाल ने जब मदद के लिए आगे आकर एंबुलेंस चलाने की बात कही लेकिन उसे अनुमति नहीं दी गई। करीब दो घंटे बाद 108 एम्बुलेंस पहुंची, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। श्रीनगर ले जाते समय रास्ते में ही शिखा और उनके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई
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इस मामले में अस्पताल प्रभारी डॉ. अंजना गुप्ता का कहना है कि सवा आठ बजे महिला को लेकर पड़ोसी सीएचसी पहुंचे थे। महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। उन्होंने महिला को स्थिर करने की कोशिश की थी। साथ ही 108 को फोन भी किया था। उन्होंने बताया कि महिला का रक्तस्राव घर पर सीढ़ियों से गिरने से शुरू हुआ था। अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस का चालक छुट्टी पर गया हुआ था।
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घटना बुधवार शाम करीब सात बजे की है। खाना बनाते समय शिखा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसके चिल्लाने पर पड़ोस में रहने वाले दुकानदार शीशपाल भंडारी जब कमरे में पहुंचे तो शिखा लहूलुहान हालत में थीं। उन्होंने तत्काल एक स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालक को बुलाया और अपनी निजी गाड़ी से शिखा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बागी पहुंचाया। इसी दौरान मेडिकल स्टोर संचालक ने 108 एम्बुलेंस सेवा पर भी कॉल की। अस्पताल पहुंचने तक शिखा होश में थीं और बातचीत कर रही थीं। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल श्रीनगर रेफर करने की सलाह दी। हालांकि अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस खड़ी होने के बावजूद प्रशासन ने यह कहकर वाहन उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया कि चालक छुट्टी पर है और एम्बुलेंस का स्टेयरिंग खराब है। शीशपाल ने जब मदद के लिए आगे आकर एंबुलेंस चलाने की बात कही लेकिन उसे अनुमति नहीं दी गई। करीब दो घंटे बाद 108 एम्बुलेंस पहुंची, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। श्रीनगर ले जाते समय रास्ते में ही शिखा और उनके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई
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इस मामले में अस्पताल प्रभारी डॉ. अंजना गुप्ता का कहना है कि सवा आठ बजे महिला को लेकर पड़ोसी सीएचसी पहुंचे थे। महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। उन्होंने महिला को स्थिर करने की कोशिश की थी। साथ ही 108 को फोन भी किया था। उन्होंने बताया कि महिला का रक्तस्राव घर पर सीढ़ियों से गिरने से शुरू हुआ था। अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस का चालक छुट्टी पर गया हुआ था।

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