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Pauri News: भारतीय विज्ञान, आयुर्वेद भाषण की प्रतियोगिताएं होंगी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sun, 18 Jan 2026 07:00 PM IST
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देवप्रयाग केंद्रीय संस्कृत विवि में कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथि ------ संवाद
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श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में राज्य स्तरीय शास्त्रीय स्पर्धाओं का आगाज
- निरंतर अभ्यास और स्वयं को कसौटी पर परखने वाला है सफल प्रो. भोलानाथ झा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय शास्त्रीय स्पर्धाओं का शुभारंभ हुआ। दो दिनों तक भारतीय विज्ञान, वेद भाष्य, वेदांत भाष्य और आयुर्वेद भाषण जैसी कुल 31 विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी। प्रतियोगिता में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 100 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे।
रविवार को स्पर्धाओं का उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व आचार्य प्रो. भोलानाथ झा (भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार) ने किया। उन्होंने कहा कि स्पर्धा में केवल शीर्ष स्थान प्राप्त करना ही सफलता नहीं है बल्कि शास्त्र का निरंतर अभ्यास कर स्वयं को कसौटी पर परखने वाला हर प्रतिभागी सफल है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक विदेशी आक्रांताओं के शासन के बावजूद यदि भारत का प्राचीन ज्ञान सुरक्षित रहा तो इसका श्रेय हमारे शास्त्रों और शास्त्रकारों को जाता है। विशिष्ट अतिथि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रो. अशोक थपलियाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को शास्त्र में निपुण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने आयोजन की गरिमा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक डॉ. ब्रह्मानंद मिश्रा ने बताया कि प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 100 से अधिक छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। संचालन डॉ. गणेश्वरनाथ झा ने किया। इस मौके पर प्रो. चंद्रकला आर कोंडी, डॉ. दिनेश चंद्र पांडेय, डॉ. रघु बी राज, डॉ. वैथी सुब्रह्मण्यम, डॉ. सुशील बडोनी, प्रो. अनीता और डॉ. सुधांशु वर्मा आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय शास्त्रीय स्पर्धाओं का शुभारंभ हुआ। दो दिनों तक भारतीय विज्ञान, वेद भाष्य, वेदांत भाष्य और आयुर्वेद भाषण जैसी कुल 31 विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी। प्रतियोगिता में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 100 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे।
रविवार को स्पर्धाओं का उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व आचार्य प्रो. भोलानाथ झा (भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार) ने किया। उन्होंने कहा कि स्पर्धा में केवल शीर्ष स्थान प्राप्त करना ही सफलता नहीं है बल्कि शास्त्र का निरंतर अभ्यास कर स्वयं को कसौटी पर परखने वाला हर प्रतिभागी सफल है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक विदेशी आक्रांताओं के शासन के बावजूद यदि भारत का प्राचीन ज्ञान सुरक्षित रहा तो इसका श्रेय हमारे शास्त्रों और शास्त्रकारों को जाता है। विशिष्ट अतिथि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रो. अशोक थपलियाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को शास्त्र में निपुण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने आयोजन की गरिमा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक डॉ. ब्रह्मानंद मिश्रा ने बताया कि प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 100 से अधिक छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। संचालन डॉ. गणेश्वरनाथ झा ने किया। इस मौके पर प्रो. चंद्रकला आर कोंडी, डॉ. दिनेश चंद्र पांडेय, डॉ. रघु बी राज, डॉ. वैथी सुब्रह्मण्यम, डॉ. सुशील बडोनी, प्रो. अनीता और डॉ. सुधांशु वर्मा आदि मौजूद रहे।
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