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Pithoragarh News: सियासी सूखा... उत्तराखंड को तीन सीएम देने वाले पिथौरागढ़ की कैबिनेट में अनदेखी
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 20 Mar 2026 10:50 PM IST
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड राज्य आंदोलन की धुरी रहे और प्रदेश को तीन-तीन मुख्यमंत्री (भगत सिंह कोश्यारी, हरीश रावत और पुष्कर सिंह धामी) देने वाले सीमांत जिले पिथौरागढ़ के लिए कैबिनेट विस्तार एक बार फिर निराशा लेकर आया है। नेपाल और चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे इस सामरिक जिले को उम्मीद थी कि इस बार कैबिनेट का सूखा खत्म होगा लेकिन राजनीतिक समीकरणों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
सीमांत जिले ने राज्य गठन के लिए हुए आंदोलन में पूर्व विधायक और यूकेडी के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, डॉ. डीडी पंत और पूर्व राज्यपाल व प्रदेश के सीएम रहे पद्मश्री भगत सिंह कोश्यारी के रूप में मजबूत नेतृत्व दिया। वर्ष 2000 में इस आंदोलन की बदौलत नए राज्य उत्तराखंड का गठन हुआ।
नेपाल और चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे सीमांत जिले के लिए भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व जरूरी समझा जाता है। सभी को उम्मीद थी राज्य की लड़ाई में मजबूत योद्धा देने वाले सीमांत जिले को कैबिनेट में स्थान मिलेगा। अब तक इतिहास की भी बात करें तो भाजपा सरकार में जिले को डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल और स्व. प्रकाश पंत के रूप में दो-दो बार कैबिनेट में प्रतिनिधित्व का मौका मिल चुका है।
वर्ष 2022 के चुनाव के बाद यह परंपरा टूटी और इस बार हुए कैबिनेट विस्तार में इसके फिर से जुड़ने की उम्मीद थी। जिले से छह बार के विधायक बिशन सिंह चुफाल को कैबिनेट में शामिल करने की अंतिम समय तक चर्चा थी। आखिरकार यह उम्मीद टूटी है और पूरे प्रदेश में बारिश के बाद भी सीमांत जिले के लिए कैबिनेट में प्रतिनिधित्व का सूखा फिर से हरा नहीं हो सका है। हालांकि तीन दायित्वधारियों के रूप में जिले को सरकार में प्रतिनिधित्व दिया गया है।
कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलता को पीएम के विजन को भी मिलता बल
सीमांत जिला दो देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने सीमा पर बसे यहां के कई गांवों को बाइव्रेंट विजेल के रूप में विकसित करने की योजना चलाई है। प्रधानमंत्री खुद आदि कैलाश पहुंचकर इस योजना को सार्थक बनाने का संकल्प लेकर लौटे हैं। ऐसे में साफ है कि इस जिले को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलने से प्रधानमंत्री की योजना को बल मिलता। कैबिनेट का जिले का प्रतिनिधि केंद्र और राज्य के बीच सेतु काम कर वाइब्रेंट विलेज के विकास की योजनाओं को सार्थक करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था।
जिले को कैबिनेट में स्थान न मिलना है चर्चाओं में
सीमांत जिले में बिशन सिंह चुफाल ऐसे विधायक हैं जो छह बार लगातार चुनाव जीते हैं। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में उनका नाम शामिल है। कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट शुरू होते ही उनके नाम की चर्चा जोरों पर थी। वह अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर चर्चाओं में थे। वहीं एक दायित्वधारी और ब्लॉक प्रमुख के साथ उनकी रार सामने आ चुकी है। चर्चा है कि यही रार भी जिले को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व दिलाने से पीछे करने का कारण हो सकती है।
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कोट
- सीएम इसी जिले के हैं। वह पूरे प्रदेश का सफलता पूर्वक प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कैबिनेट में किसी जगह मिलेगी और किसे नहीं यह शीर्ष नेतृत्व तय करता है। पार्टी का हर फैसला मामना हर कार्यकर्ता का दायित्व है। - गिरीश जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष, पिथौरागढ़
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सीमांत जिले ने राज्य गठन के लिए हुए आंदोलन में पूर्व विधायक और यूकेडी के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, डॉ. डीडी पंत और पूर्व राज्यपाल व प्रदेश के सीएम रहे पद्मश्री भगत सिंह कोश्यारी के रूप में मजबूत नेतृत्व दिया। वर्ष 2000 में इस आंदोलन की बदौलत नए राज्य उत्तराखंड का गठन हुआ।
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नेपाल और चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे सीमांत जिले के लिए भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व जरूरी समझा जाता है। सभी को उम्मीद थी राज्य की लड़ाई में मजबूत योद्धा देने वाले सीमांत जिले को कैबिनेट में स्थान मिलेगा। अब तक इतिहास की भी बात करें तो भाजपा सरकार में जिले को डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल और स्व. प्रकाश पंत के रूप में दो-दो बार कैबिनेट में प्रतिनिधित्व का मौका मिल चुका है।
वर्ष 2022 के चुनाव के बाद यह परंपरा टूटी और इस बार हुए कैबिनेट विस्तार में इसके फिर से जुड़ने की उम्मीद थी। जिले से छह बार के विधायक बिशन सिंह चुफाल को कैबिनेट में शामिल करने की अंतिम समय तक चर्चा थी। आखिरकार यह उम्मीद टूटी है और पूरे प्रदेश में बारिश के बाद भी सीमांत जिले के लिए कैबिनेट में प्रतिनिधित्व का सूखा फिर से हरा नहीं हो सका है। हालांकि तीन दायित्वधारियों के रूप में जिले को सरकार में प्रतिनिधित्व दिया गया है।
कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलता को पीएम के विजन को भी मिलता बल
सीमांत जिला दो देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने सीमा पर बसे यहां के कई गांवों को बाइव्रेंट विजेल के रूप में विकसित करने की योजना चलाई है। प्रधानमंत्री खुद आदि कैलाश पहुंचकर इस योजना को सार्थक बनाने का संकल्प लेकर लौटे हैं। ऐसे में साफ है कि इस जिले को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलने से प्रधानमंत्री की योजना को बल मिलता। कैबिनेट का जिले का प्रतिनिधि केंद्र और राज्य के बीच सेतु काम कर वाइब्रेंट विलेज के विकास की योजनाओं को सार्थक करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था।
जिले को कैबिनेट में स्थान न मिलना है चर्चाओं में
सीमांत जिले में बिशन सिंह चुफाल ऐसे विधायक हैं जो छह बार लगातार चुनाव जीते हैं। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में उनका नाम शामिल है। कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट शुरू होते ही उनके नाम की चर्चा जोरों पर थी। वह अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर चर्चाओं में थे। वहीं एक दायित्वधारी और ब्लॉक प्रमुख के साथ उनकी रार सामने आ चुकी है। चर्चा है कि यही रार भी जिले को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व दिलाने से पीछे करने का कारण हो सकती है।
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कोट
- सीएम इसी जिले के हैं। वह पूरे प्रदेश का सफलता पूर्वक प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कैबिनेट में किसी जगह मिलेगी और किसे नहीं यह शीर्ष नेतृत्व तय करता है। पार्टी का हर फैसला मामना हर कार्यकर्ता का दायित्व है। - गिरीश जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष, पिथौरागढ़