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Pithoragarh News: मौसमी बीमारियों ने पैर पसारे, अस्पताल में कम पड़ गए बेड
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 03 May 2026 10:32 PM IST
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पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में बरामदे में बिस्तर लगाकर इलाज कराते मरीज। संवाद
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पिथौरागढ़। बदले मौसम ने सीमांत के लोगों की सेहत बिगाड़ दी है। बारिश और ओलावृष्टि के कारण पारे में गिरावट आने से सुबह-शाम ठंड पड़ रही है तो दिन में गर्मी पड़ने से लोग निमोनिया और टायफाइड की जकड़ में आ रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ गया है और बिस्तर कम पड़ गए हैं। भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या अधिक होने से अस्पताल प्रबंधन को बरामदे में बिस्तर लगाने पड़े हैं। स्थिति यह है कि अस्पताल में 120 बेड के सापेक्ष 145 मरीज भर्ती हैं।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, मौसम में बदलाव से लोगों की सेहत बिगड़ रही है। ओपीडी में भी इससे उछाल आया है। रोजाना 700 से अधिक लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। अधिकांश मरीज निमोनिया और टायफाइड से ग्रसित मिल रहे हैं जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। मौसम बदलने से निमोनिया और टायफाइड गंभीर रूप ले रहा है और मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ रही है। उन्होंने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में सभी बेड फुल हो गए हैं। मरीजों के दबाव को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बरामदे में 25 अतिरिक्त बेड लगाने पड़े हैं।
एक सप्ताह में पांच डिग्री गिरा तापमान
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, तापमान में उतार-चढ़ाव से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। मैदानी क्षेत्रों में जहां भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं, वहीं सीमांत जिले में सुबह-शाम ठंड पड़ रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते एक सप्ताह के भीतर जिले तापमान पांच डिग्री गिरा है। बीते शनिवार जिले का अधिकतम तापमान 26 डिग्री था। रविवार को तापमान 21 डिग्री रिकार्ड किया गया। आम तौर पर अप्रैल में सीमांत जिले का औसत तापमान 25 से 30 डिग्री के बीच रहता है।
बुजुर्ग जूझ रहे सांस की दिक्कत से
सीमांत जिले में मौसम में बदलाव के चलते जहां बच्चे निमोनिया और टायफाइड से जूझ रहे हैं वहीं बुजुर्गों में सांस की दिक्कत बढ़ गई है। जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, हर रोज 65 से 75 वर्ष के 12 से अधिक बुजुर्ग सांस फूलने, फेफड़ों में संक्रमण आदि दिक्कत से जूझते हुए इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम बदलने से बुजुर्गों में यह बीमारी गंभीर हो रही है। चिकित्सकों के मुताबिक, सुबह और शाम पर्याप्त कपड़ों के साथ बाहर निकलना जरूरी है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए शुद्ध पानी और पौष्टिक भोजन लाभकारी होगा।
कोट
मौसम में बदलाव के चलते लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। हर मरीज को बेहतर इलाज मिले इसके लिए बरामदे में बेड लगाए गए हैं। - डॉ.भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
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अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, मौसम में बदलाव से लोगों की सेहत बिगड़ रही है। ओपीडी में भी इससे उछाल आया है। रोजाना 700 से अधिक लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। अधिकांश मरीज निमोनिया और टायफाइड से ग्रसित मिल रहे हैं जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। मौसम बदलने से निमोनिया और टायफाइड गंभीर रूप ले रहा है और मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ रही है। उन्होंने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में सभी बेड फुल हो गए हैं। मरीजों के दबाव को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बरामदे में 25 अतिरिक्त बेड लगाने पड़े हैं।
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एक सप्ताह में पांच डिग्री गिरा तापमान
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, तापमान में उतार-चढ़ाव से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। मैदानी क्षेत्रों में जहां भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं, वहीं सीमांत जिले में सुबह-शाम ठंड पड़ रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते एक सप्ताह के भीतर जिले तापमान पांच डिग्री गिरा है। बीते शनिवार जिले का अधिकतम तापमान 26 डिग्री था। रविवार को तापमान 21 डिग्री रिकार्ड किया गया। आम तौर पर अप्रैल में सीमांत जिले का औसत तापमान 25 से 30 डिग्री के बीच रहता है।
बुजुर्ग जूझ रहे सांस की दिक्कत से
सीमांत जिले में मौसम में बदलाव के चलते जहां बच्चे निमोनिया और टायफाइड से जूझ रहे हैं वहीं बुजुर्गों में सांस की दिक्कत बढ़ गई है। जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, हर रोज 65 से 75 वर्ष के 12 से अधिक बुजुर्ग सांस फूलने, फेफड़ों में संक्रमण आदि दिक्कत से जूझते हुए इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम बदलने से बुजुर्गों में यह बीमारी गंभीर हो रही है। चिकित्सकों के मुताबिक, सुबह और शाम पर्याप्त कपड़ों के साथ बाहर निकलना जरूरी है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए शुद्ध पानी और पौष्टिक भोजन लाभकारी होगा।
कोट
मौसम में बदलाव के चलते लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। हर मरीज को बेहतर इलाज मिले इसके लिए बरामदे में बेड लगाए गए हैं। - डॉ.भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
