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गिरी एक और दीवारः लिपुलेख के रास्ते चीन के साथ 6 साल बाद फिर शुरू होगा व्यापार, जून से सितंबर तक चलेगा कारोबार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 21 Mar 2026 07:00 AM IST
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सार

सीमांत व्यापार संगठन का कहना है कि इससे व्यापारियों को 2019 से तिब्बत के तकलाकोट स्थित भंडारगृहों में रखा अपना सामान वापस लाने में भी मदद मिलेगी। 

Trade with China via Lipulekh will resume after six years
demo - फोटो : ANI
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विस्तार

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे के जरिये भारत-चीन सीमा व्यापार छह साल के बाद फिर से शुरू किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सीमांत व्यापार संगठन का कहना है कि इससे व्यापारियों को 2019 से तिब्बत के तकलाकोट स्थित भंडारगृहों में रखा अपना सामान वापस लाने में भी मदद मिलेगी। 

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पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगाई ने बताया कि केंद्र सरकार से निर्देश मिलने के बाद जून से सितंबर तक संचालित होने वाले व्यापार सत्र की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विदेश मंत्रालय की तरफ से इस संबंध में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किए जाने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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गौरतलब है कि लिपुलेख दर्रे के माध्यम से चीन के साथ सीमा व्यापार लंबे समय तक बंद रहने के बाद 1992 में पुनः शुरू हुआ था, लेकिन 2019-20 में पहले कोविड-19 महामारी और फिर गलवां में झड़प के बाद से यह व्यापारिक मार्ग ठप पड़ा था।

जिलाधिकारी के मुताबिक, भारत सरकार के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को पत्र लिखकर लिपुलेख दर्रे से चीन के साथ सीमा व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया। पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से भी एनओसी दिए जाने का उल्लेख किया गया है। भटगाई ने बताया कि राज्य सरकार से संबंधित विभागों और एजेंसियों को निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है ताकि वर्ष 2026 के व्यापार सत्र के अनुसार सीमा व्यापार की बहाली सुनिश्चित की जा सके। 

पारंपरिक वस्तुओं का होता है व्यापार
लिपुलेख दर्रे के माध्यम से व्यापार मुख्यत: स्थानीय और पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित रहा है। वर्ष 2018 में दोनों देशों के बीच 6.55 करोड़ रुपये का कुल कारोबार हुआ था।

  • भारत से निर्यात : गुड़, मिश्री, तंबाकू, मसाले, दालें, कॉफी, वनस्पति तेल, घी, कपड़े, बर्तन और सौंदर्य प्रसाधन
  • चीन (तिब्बत) से आयात : ऊन, पश्मीना, रेशम, याक की पूंछ, बकरी-भेड़, बोरेक्स, रेडीमेड कपड़े और जूते

चीन के साथ साझा करेंगे संपर्क विवरण...
केंद्र ने स्थानीय अधिकारियों के संपर्क विवरण चीन के साथ साझा करने की बात भी कही है, जिससे दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। जिलाधिकारी ने कहा कि व्यापार सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए ट्रेड पास जारी करने वाले अधिकारियों, मुद्रा विनिमय के लिए नामित बैंकों, सीमा शुल्क विभाग तथा धारचूला प्रशासन को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। व्यापारियों के लिए मार्ग में पड़ने वाले शिविर, संचार, बैंकिंग, सुरक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाएगी।

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