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Rishikesh News: तंबाकू युक्त खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध, अब धरातल पर कार्रवाई की दरकार
Wed, 14 Oct 2026 06:33 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Wed, 14 Oct 2026 06:33 PM IST
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- एक साल तक निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक, ऋषिकेश में नशामुक्ति अभियान और नियमित जांच की उठी मांग
ऋषिकेश। उत्तराखंड में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू-निकोटिन युक्त खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने 13 अक्तूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ऋषिकेश सहित प्रदेशभर में दुकानों और गोदामों की नियमित जांच, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई व जनजागरूकता अभियान जरूरी होंगे। प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले से जनस्वास्थ्य पर नई उम्मीद जगी है। सरकार के इस कदम को तंबाकू सेवन पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश सहित तीर्थनगरी ऋषिकेश के बाजारों, छोटी दुकानों, पान के खोखों और थोक प्रतिष्ठानों में नियमित जांच के साथ ही जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी होगा।
- स्वास्थ्य के लिहाज से प्रतिबंध अच्छा कदम है। व्यापारियों को भी नियमों का पालन करना चाहिए। प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि दुकानदारों को पता रहे कि कौन से उत्पाद प्रतिबंध के दायरे में हैं। सभी दुकानों की समान रूप से जांच होनी चाहिए। - हरिराम वर्मा, स्थानीय व्यापारी। (फोटो)
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गुटखा और तंबाकू के सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। सरकार ने प्रतिबंध लगाकर अच्छा प्रयास किया है लेकिन इसकी सफलता तभी होगी जब चोरी-छिपे बिक्री करने वालों पर कार्रवाई होगी। स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। - प्रतीक कालिया, भाजपा जिला महामंत्री। (फोटो)
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युवाओं में गुटखा और तंबाकू की आदत को रोकने के लिए केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है। कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। जो युवा इसकी लत छोड़ना चाहते हैं, उन्हें उचित परामर्श और सहायता भी मिलनी चाहिए। - मनु प्रताप सिंह, एबीवीपी जिला संगठन मंत्री। (फोटो)
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तंबाकू उत्पादों का असर केवल सेवन करने वाले व्यक्ति पर नहीं बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। घर की कमाई का एक हिस्सा इस आदत में खर्च होता है, बीमारी होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। प्रशासन को प्रतिबंध के साथ परिवारों और युवाओं को जागरूक करने पर भी जोर देना चाहिए। - शीतल यादव, गृहणी। (फोटो)
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ऋषिकेश। उत्तराखंड में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू-निकोटिन युक्त खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने 13 अक्तूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ऋषिकेश सहित प्रदेशभर में दुकानों और गोदामों की नियमित जांच, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई व जनजागरूकता अभियान जरूरी होंगे। प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले से जनस्वास्थ्य पर नई उम्मीद जगी है। सरकार के इस कदम को तंबाकू सेवन पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश सहित तीर्थनगरी ऋषिकेश के बाजारों, छोटी दुकानों, पान के खोखों और थोक प्रतिष्ठानों में नियमित जांच के साथ ही जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी होगा।
- स्वास्थ्य के लिहाज से प्रतिबंध अच्छा कदम है। व्यापारियों को भी नियमों का पालन करना चाहिए। प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि दुकानदारों को पता रहे कि कौन से उत्पाद प्रतिबंध के दायरे में हैं। सभी दुकानों की समान रूप से जांच होनी चाहिए। - हरिराम वर्मा, स्थानीय व्यापारी। (फोटो)
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गुटखा और तंबाकू के सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। सरकार ने प्रतिबंध लगाकर अच्छा प्रयास किया है लेकिन इसकी सफलता तभी होगी जब चोरी-छिपे बिक्री करने वालों पर कार्रवाई होगी। स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। - प्रतीक कालिया, भाजपा जिला महामंत्री। (फोटो)
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युवाओं में गुटखा और तंबाकू की आदत को रोकने के लिए केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है। कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। जो युवा इसकी लत छोड़ना चाहते हैं, उन्हें उचित परामर्श और सहायता भी मिलनी चाहिए। - मनु प्रताप सिंह, एबीवीपी जिला संगठन मंत्री। (फोटो)
तंबाकू उत्पादों का असर केवल सेवन करने वाले व्यक्ति पर नहीं बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। घर की कमाई का एक हिस्सा इस आदत में खर्च होता है, बीमारी होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। प्रशासन को प्रतिबंध के साथ परिवारों और युवाओं को जागरूक करने पर भी जोर देना चाहिए। - शीतल यादव, गृहणी। (फोटो)