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समाचारपत्र ने राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया : चिदानंद
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:27 AM IST
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भारतीय समाचार पत्र दिवस पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने संपूर्ण पत्रकारिता जगत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत में पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा है। समाचार पत्रों की राष्ट्र निर्माण में अद्भुत भूमिका रही है। यह दिन पत्रकारिता के निर्भीक चेतना का उत्सव है, जिसने भारत में सत्य, साहस और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की नींव रखी।
भारतीय समाचारपत्र दिवस हमें उस युग में ले जाता है, जब शब्दों की ताकत से साम्राज्यों की नींव हिल जाया करती थी। 29 जनवरी 1780 को प्रकाशित हुआ भारत का पहला समाचारपत्र हिक्की का बंगाल गजट भारत ही नहीं एशिया का भी पहला मुद्रित समाचार पत्र था। समाचार पत्र प्रश्न पूछने का साहस रखने वाले पहली स्वतंत्र आवाज होते हैं।
भारतीय पत्रकारिता की जड़े भय में नहीं, बल्कि धर्म, दायित्व और जनहित में निहित हैं। समाचारपत्र केवल सूचना देने का माध्यम नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाज को दिशा दी, जनमानस को जागृत किया और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया। भारतीय समाचारपत्र अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और सकारात्मक सोच के साथ समाज की सेवा करते रहे, शब्द जब जिम्मेदारी के साथ लिखे जाते हैं, तो वे इतिहास बनाते हैं।
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भारतीय पत्रकारिता की जड़े भय में नहीं, बल्कि धर्म, दायित्व और जनहित में निहित हैं। समाचारपत्र केवल सूचना देने का माध्यम नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाज को दिशा दी, जनमानस को जागृत किया और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया। भारतीय समाचारपत्र अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और सकारात्मक सोच के साथ समाज की सेवा करते रहे, शब्द जब जिम्मेदारी के साथ लिखे जाते हैं, तो वे इतिहास बनाते हैं।

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