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Rishikesh News: जयकारों से गूंजा मां कात्यायनी का दरबार, कन्या पूजन के साथ नवरात्र संपन्न
Mon, 19 Oct 2026 06:32 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 19 Oct 2026 06:32 PM IST
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- महानवमी पर 100 से अधिक कन्याओं का पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ और मां का भव्य श्रृंगार, मंदिरों से घरों तक दिखा भक्ति का उल्लास
ढालवाला। शीशम झाड़ी स्थित प्रतिष्ठित कात्यायनी मंदिर में महानवमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ, विशेष पूजा-अर्चना और मां का भव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर में 100 से अधिक कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें उपहार भेंट किए गए। वहीं, ऋषिकेश, मुनि की रेती और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना, कन्या पूजन और भोग अर्पित कर शारदीय नवरात्र का समापन किया।महानवमी के अवसर पर सुबह से ही कात्यायनी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। पुजारियों और आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ संपन्न कराया। इसके बाद मां की आरती उतारी गई और विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर देवी के जयकारों से गूंजता रहा।
100 से अधिक कन्याओं का पूजन
अनुष्ठान के दौरान 100 से अधिक कन्याओं का पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं के चरण धोकर तिलक लगाया और उन्हें उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया।
मंदिर प्रबंधक गुरविंदर सलुजा ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों तक मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। शाम को भजन संध्या के माध्यम से नवदुर्गा की आराधना हुई, जिसमें स्थानीय नागरिकों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया।
घरों और मंदिरों में हुई मां सिद्धिदात्री की पूजा
महानवमी पर ऋषिकेश, मुनि की रेती और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की। घरों में पूरी, काले चने और सूजी के हलवे का भोग लगाया गया। कन्याओं और बटुकों को भोजन कराने के बाद श्रद्धालुओं ने व्रत का पारण किया और परिवार व क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
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ढालवाला। शीशम झाड़ी स्थित प्रतिष्ठित कात्यायनी मंदिर में महानवमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ, विशेष पूजा-अर्चना और मां का भव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर में 100 से अधिक कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें उपहार भेंट किए गए। वहीं, ऋषिकेश, मुनि की रेती और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना, कन्या पूजन और भोग अर्पित कर शारदीय नवरात्र का समापन किया।महानवमी के अवसर पर सुबह से ही कात्यायनी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। पुजारियों और आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ संपन्न कराया। इसके बाद मां की आरती उतारी गई और विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर देवी के जयकारों से गूंजता रहा।
100 से अधिक कन्याओं का पूजन
अनुष्ठान के दौरान 100 से अधिक कन्याओं का पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं के चरण धोकर तिलक लगाया और उन्हें उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया।
मंदिर प्रबंधक गुरविंदर सलुजा ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों तक मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। शाम को भजन संध्या के माध्यम से नवदुर्गा की आराधना हुई, जिसमें स्थानीय नागरिकों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया।
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घरों और मंदिरों में हुई मां सिद्धिदात्री की पूजा
महानवमी पर ऋषिकेश, मुनि की रेती और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की। घरों में पूरी, काले चने और सूजी के हलवे का भोग लगाया गया। कन्याओं और बटुकों को भोजन कराने के बाद श्रद्धालुओं ने व्रत का पारण किया और परिवार व क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
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