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Rishikesh News: राहुल गांधी तक पहुंचा बापूग्राम का मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Thu, 15 Jan 2026 01:28 AM IST
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नगर निगम पार्षद अभिनव सिंह मलिक ने वन विभाग की कार्रवाई से बापूग्राम और आसपास के क्षेत्रों को बचाने के लिए लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद बापूग्राम, पशुलोक और शिवाजी नगर की लगभग एक लाख की आबादी में व्याप्त डर का जिक्र किया गया है। मलिक ने इस मुद्दे को महात्मा गांधी की विरासत और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीने के अधिकार से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है।
पार्षद ने लिखा है कि वर्ष 1946-47 में जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था, तब तत्कालीन संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) की सरकार ने महात्मा गांधी की परम शिष्या मीरा बेन (मैडलिन स्लेड) को यहां आमंत्रित किया था। उस समय की सरकार ने आधिकारिक तौर पर उन्हें ऋषिकेश के वीरभद्र ब्लॉक में करीब 1,000 हेक्टेयर (करीब 2866 एकड़) वन भूमि आवंटित की थी।
इस आवंटन का मुख्य उद्देश्य पशुलोक आश्रम की स्थापना करना और साथ ही विभाजन की त्रासदी झेल रहे शरणार्थियों, स्वतंत्रता सेनानियों और भूमिहीन गरीबों का पुनर्वास करना था। स्वयं बापू ने 16 जनवरी 1948 को एक पत्र लिखकर इस क्षेत्र का नाम पशुलोक सुझाया था, जो आज भी हमारे लिए एक धरोहर है।
जिस जनता को सरकार ने खुद बसाया। बीते 60-70 वर्षों से बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसी तमाम सुविधाएं दी गईं, आज उसी जनता को उच्चतम न्यायालय में चल रहे एक वाद की आड़ लेकर अतिक्रमणकारी घोषित किया जा रहा है।
उन्होंने राहुल गांधी से अपील करते हुए कहा कि वे आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं। केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं और मांग करें कि संसद और राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाए। इस सत्र के एजेंडे में ऋषिकेश के बापूग्राम, पशुलोक और शिवाजी नगर जैसे पुराने बसे हुए क्षेत्रों को वन कानूनों के दायरे से बाहर निकालकर उन्हें तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करना हो।
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पार्षद ने लिखा है कि वर्ष 1946-47 में जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था, तब तत्कालीन संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) की सरकार ने महात्मा गांधी की परम शिष्या मीरा बेन (मैडलिन स्लेड) को यहां आमंत्रित किया था। उस समय की सरकार ने आधिकारिक तौर पर उन्हें ऋषिकेश के वीरभद्र ब्लॉक में करीब 1,000 हेक्टेयर (करीब 2866 एकड़) वन भूमि आवंटित की थी।
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इस आवंटन का मुख्य उद्देश्य पशुलोक आश्रम की स्थापना करना और साथ ही विभाजन की त्रासदी झेल रहे शरणार्थियों, स्वतंत्रता सेनानियों और भूमिहीन गरीबों का पुनर्वास करना था। स्वयं बापू ने 16 जनवरी 1948 को एक पत्र लिखकर इस क्षेत्र का नाम पशुलोक सुझाया था, जो आज भी हमारे लिए एक धरोहर है।
जिस जनता को सरकार ने खुद बसाया। बीते 60-70 वर्षों से बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसी तमाम सुविधाएं दी गईं, आज उसी जनता को उच्चतम न्यायालय में चल रहे एक वाद की आड़ लेकर अतिक्रमणकारी घोषित किया जा रहा है।
उन्होंने राहुल गांधी से अपील करते हुए कहा कि वे आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं। केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं और मांग करें कि संसद और राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाए। इस सत्र के एजेंडे में ऋषिकेश के बापूग्राम, पशुलोक और शिवाजी नगर जैसे पुराने बसे हुए क्षेत्रों को वन कानूनों के दायरे से बाहर निकालकर उन्हें तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करना हो।

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