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Rudraprayag News: दो दोषियों को दो-दो वर्ष का कठोर कारावास
Thu, 16 Jul 2026 06:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Thu, 16 Jul 2026 06:09 PM IST
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न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का ले रहे थे लाभ
अदालत
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा के दौरान स्वयं को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने वाले दो आरोपियों को सिविल जज सीडी जेएम अभिजीत कुमार की अदालत ने दोषी ठहराया और दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना जमा न करने पर उन्हें एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा के दौरान कार में सवार कुछ लोग स्वयं को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। सूचना पर पहुंची थाना गुप्तकाशी पुलिस ने वाहन की जांच की। चालक ने अपना नाम अविनाश मोहन गुप्ता बताते हुए स्वयं को सिविल जज, लखनऊ बताया। जबकि साथ बैठी महिला ने अपना नाम ज्योति दुबे बताया। पुलिस ने न्यायिक सेवा से संबंधित पहचानपत्र मांगे तो आईकार्ड संदिग्ध दिखा। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे थे। तब थाना गुप्तकाशी में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सिविल जज सीडी/जेएम अभिजीत कुमार की अदालत ने फैसला सुनाते हुए अविनाश मोहन गुप्ता और ज्योति दुबे को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड भी लगाया।
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अदालत
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा के दौरान स्वयं को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने वाले दो आरोपियों को सिविल जज सीडी जेएम अभिजीत कुमार की अदालत ने दोषी ठहराया और दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना जमा न करने पर उन्हें एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा के दौरान कार में सवार कुछ लोग स्वयं को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। सूचना पर पहुंची थाना गुप्तकाशी पुलिस ने वाहन की जांच की। चालक ने अपना नाम अविनाश मोहन गुप्ता बताते हुए स्वयं को सिविल जज, लखनऊ बताया। जबकि साथ बैठी महिला ने अपना नाम ज्योति दुबे बताया। पुलिस ने न्यायिक सेवा से संबंधित पहचानपत्र मांगे तो आईकार्ड संदिग्ध दिखा। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे थे। तब थाना गुप्तकाशी में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सिविल जज सीडी/जेएम अभिजीत कुमार की अदालत ने फैसला सुनाते हुए अविनाश मोहन गुप्ता और ज्योति दुबे को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड भी लगाया।
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